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19 November 2020

20 नवंबर को मनाया जाएगा छठ महापर्व, छठी मईया का सूर्यदेव से है खास रिश्ता, जानें पौराणिक कथा

 

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धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन और भाई दूज के बाद आती है छठ पूजा (chhath puja 2020). कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाने वाली छठ की बहुत मान्यता होती है और इस साल छठ पूजा 20 नवंबर को मनाई जाएगी. चार दिनों तक चलने वाला पर्व संतान की खुशहाली और अच्छे जीवन की कामना के लिए जाता है. इस पर्व में सबसे अहम होती है सूर्योपसाना. छठ पूजा का व्रत 36 घंटें का कठिन व्रत होता है लेकिन फलदायी भी होता है. इसे सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी समान रूप से करते हैं. पर्व का समापन पूजा के बाद सप्तमी की सुबह उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने के बाद होता है. छठ पर्व का इतिहास और पौराणिक कथा बहुत प्रचलित है.

विदेशों में भी होता है छठ
यूं तो छठ का पर्व बिहार की संस्कृति बन चुका है मगर देश के अलग-अलग हिस्सों में धूमधाम के साथ मनाया जाता है. लेकिन अब लोग दूसरे देशों में भी बस चुके हैं तो विदेशों में भारत के त्योहारों और संस्कृति की धूम देखने को मिलती है.chathलोग विदेशों में अपनी परंपराओं को बखूबी निभाते हैं. वैदिक काल से चले आ रहे छठ पर्व में ॠषियों द्वारा लिखी गई ऋग्वेद सूर्य पूजन, उषा पूजन किया जाता है. छठ महापर्व पूरी तरह से भगवान सूर्य, उषा, प्रकृति, जल, वायु आदि को समर्पित होता है.

पौराणिक कथा
छठ पर्व को लेकर एक पौराणिक कथा काफी प्रचलित है. कथा की मानें तो, प्रियंवद नाम का राजा था जिसकी कोी संतान नहीं थी और उन्होंने संतानी प्राप्ति के लिए यज्ञ का आयोजन कराया. इसके बाद महर्षि कश्यप ने राजा की पत्नी मालिनी को पुत्र की प्राप्ति के लिए आहुति के लिए बनाई गई खीर प्रसाद रूप में दी और इसे ग्रहण करने से राजा को पुत्र की प्राप्ति हुई. लेकिन वो पुत्र जिंदा नहीं बल्कि मरा हुआ जन्मा. इससे राजा का हृदय काफी मायूम हो गया और पुत्र को श्मशान लेकर गए जहां वो खुद ही अपने प्राण त्यागने लगे.chhath puja kab haiराजा के वियोग को सुन ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना राजा के सामने प्रकट हुई और राजा से कहा कि वह उनकी पूजा करें. दरअसल, देवसेना सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं और इसलिए उन्हें षष्ठी या छठी मईया कहा जाता है. पुत्र की मृत्यु से दुखी राजा ने देवी की बात मान ली और उनके द्वारा कही गई बातों का पालन करते हुए विधिनुसार व्रत किया. इससे राजा को फिर पुत्र की प्राप्ति हुई. तभी से ऐसी मान्यता है कि संतान प्राप्ति और संतान के सुखी जीवन के लिए छठी मईया का पूजन करना चाहिए और उपवास करना चाहिए.

क्यों दिया जाता है सूर्य को अर्घ्य
ये तो थी छठी मईया की पौराणिक कथा. लेकिन छट पर्व में सूर्य की उपासना का महत्व होता है और इसके पीछे भी एक अन्य कथा है. ऐसा कहा जाता है कि, महाभारत काल के समय छठ पर्व का आरमभ हुआ था और इसकी शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने की थी.surya-dev-ko-jal-chadhne-ke-niyam_chatthकर्ण प्रतिदिन घटों तक कमर तक पानी में खड़े रहते थे और सूर्य देव की पूजा कर उन्हें अर्घ्य देते थे. ऐसी मान्यता है कि सूर्य की उपासना और तेज से वह एक महान योद्धा बने और तभी से सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा चली आ रही है. तो वहीं लोक प्रचलित मान्यताओं की मानें तो छठी मईया और सूर्य देव भाई-बहन है और इसी कारण छठ में दोनों की पूजा की जाती है. इनकी पूजा करने से ना सिर्फ मन को शांति मिलती है बल्कि फल की प्राप्ति होती है.

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