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05 October 2020

व्लादिमीर पुतिन अब दोबारा USSR को पुनर्जीवित करने पर काम कर रहे हैं, चीन की बढ़ेंगी मुश्किलें

 


चीन पूरी दुनिया में कोरोना एक्सपोर्ट करने में सफल रहा, उसके बाद अब रूस इस अवसर का फायदा उठाते हुए अपनी वैक्सीन डिप्लोमेसी के तहत मध्य एशिया के उन देशों पर दोबारा अपना प्रभुत्व कायम करने की कोशिश कर रहा है, जो कभी USSR का हिस्सा हुआ करते थे। बता दें कि आधिकारिक तौर पर रूस दुनिया का ऐसा पहला देश है, जिसने कोरोना की वैक्सीन को लॉंच कर दिया है। भारत में भी इसके ट्रायल होने हैं, लेकिन जिस प्रकार पुतिन इस वैक्सीन के जरिये मध्य एशिया के देशों पर अपनी छाप छोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि वे दोबारा USSR की विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

पुतिन भू-राजनीति में expert माने जाते हैं, और इस बार भी उन्होंने मध्य एशिया में बड़ा दांव चला है, लेकिन इस बार उनके निशाने पर अमेरिका नहीं, बल्कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं। दरअसल, जिस प्रकार पिछले एक दशक में चीन ने मध्य एशिया के देशों पर अपना प्रभाव जमाकर वहाँ रूस की पकड़ को कमजोर किया है, उसके बाद अब पुतिन इस विपदा का फायदा उठाकर यहाँ चीन को पटखनी देना चाहते हैं और इसके लिए वे अपनी वैक्सीन को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। पुतिन कज़ाकिस्तान और Moldova जैसे देशों में अपनी इस वैक्सीन का प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, जिससे की दोबारा इन देशों में रूस की सॉफ्ट पावर बढ़ सके और यहाँ चीन के प्रभाव को चुनौती दी जा सके।

पुतिन का अभी सारा focus मध्य एशिया के देशों पर ही दिखाई देता है, क्योंकि पश्चिमी देशों में अपनी वैक्सीन को लेकर वे इतने उत्साहित नहीं है। इसके अलावा United Nations और जर्मनी जैसे देश भी इस वैक्सीन की विश्वसनीयता पर सवाल उठा चुके हैं। हालांकि, मध्य एशिया के देश रूसी वैक्सीन को लेकर बेशक उत्साहित हैं। उदाहरण के लिए कोरोना के 1 लाख 41 हज़ार मामले रिपोर्ट कर चुका कज़ाकिस्तान अगस्त महीने में ही रूसी वैक्सीन को अपनाने की बात कह चुका है। इसी प्रकार उज़्बेकिस्तान और रूसी प्रशासन के बीच वर्ष 2020 और 2021 में वैक्सीन के 35 मिलियन Units भेजे जाने का करार भी हो चुका है। इसके अलावा ताजिकिस्तान भी रूस की Sputnik V वैक्सीन को इस्तेमाल करने की बात कर चुका है। रूस ने खुद इन देशों को आश्वस्त किया है कि वह इन देशों को प्राथमिकता देकर सबसे पहले वैक्सीन उपलब्ध कराएगा।

गौर किया जाये, तो ये सब वही देश हैं जो पहले USSR का हिस्सा हुआ करते थे। बेशक ये सभी देश आज स्वतंत्र राष्ट्र हैं, लेकिन वर्ष 1991 के बाद भी इन देशों पर रूस का प्रभाव ही रहा था। हालांकि, पिछले एक दशक में चीन ने यहाँ अपने पैर जमाने शुरू कर दिये हैं, जिसके कारण अब पुतिन को एक्शन में आना पड़ा है।

पुतिन ने अपना यही दांव अज़रबैजान में भी चला है। वही अज़रबैजान, जो पहले USSR का हिस्सा था, लेकिन आज जिसके तुर्की और चीन जैसे देशों के साथ बड़े करीबी संबंध है। पुतिन की वैक्सीन डिप्लोमेसी आसानी से यहाँ रूस का काम आसान कर सकती है और बाकू को हमेशा के लिए चीन और तुर्की के चंगुल से आज़ाद कर सकती है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने बेलारूस को भी यही विश्वास दिलाया था कि Sputnik V सबसे पहले बेलारूस को ही दी जाएगी। Sputnik V का इस्तेमाल कर रूस वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों में भी चीन को चुनौती देने में लगा है। पुतिन के लिए Sputnik V उस छड़ी जैसे काम कर रही है, जिससे वे मौका मिलते ही चीन को लपेटने में लगे हैं। ज़ाहिर है कि पिछले एक दशक में चीन ने इन देशों को अपनी मुट्ठी में करने के जो भी जद्दोजहद की है, उसपर अब पुतिन Sputnik V के जरिये पानी फेरने का काम कर रहे हैं।

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