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01 October 2020

‘हर मुश्किल में भारत ने हमारी मदद की’, UN में मालदीव ने भारत का आभार जताया


चीन के वफादार मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के जाने के बाद से भारत और मालदीव के बीच द्वीपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं। भारत ने ‘पड़ोसी देश पहले’ की नीति अपनाई तो मालदीव ने ‘भारत पहले की नीति’ अपनाई है जिसने इन दोनों देशों के द्वीपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया है। अब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र में मालदीव (Maldives) ने कोरोना काल में भारत द्वारा दी गई $250 मीलियन की मदद के लिए आभार जताया है।

मालदीव (Maldives) के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने अपने संबोधन के दौरान भारत से मिली आर्थिक मदद के लिए आभार जताते हुए कहा,  मैं अपने सभी सहयोगियों को धन्यवाद देता हूंजिन्होंने इस संकट के दौरान भी उदारतापूर्वक आर्थिकभौतिक और तकनीकी सहायता की हैजबकि वे खुद भी चुनौतियों से जूझ रहे थे। भारत ने तो मिसाल पेश की है। भारत की सराहना करते हुए शाहिद ने कहा, इस दौरान भारत ने 250 मिलियन डॉलर (लगभग 1842 करोड़ रुपये) की सहायता कीजो सबसे बड़ी वित्तीय मदद है।

शाहिद ने आगे कहा, ‘कोरोना महामारी के चलते दुनिया को वैश्विक सहयोग का महत्व का पता चला है । अपने दोस्तों और बहुपक्षीय सहयोगियों की मदद के बिना मालदीव (Maldives) के लिए इस मुसीबत से निपटना मुश्किल होता’।

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने सभी सहयोगियों का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने इस संकट के दौरान उदारतापूर्वक वित्तीय, सामग्री और तकनीकी सहायता को बढ़ाया है, वो भी जब वे स्वयं चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण भारत है।”

हाल ही में भारत सरकार की ओर से कर्ज़ से जूझ रहे मालदीव को 250 मिलियन डॉलर की सहायता प्रदान की गयी थी। इस सहायता के बाद मालदीव (Maldives) के राष्ट्रपति ने ट्वीट कर कहा था, “जब भी मालदीव (Maldives) को किसी मित्र की जरूरत पड़ी, भारत हमेशा इस अवसर पर पहुंचा। वित्तीय सहायता के रूप में 25 करोड़ डॉलर के आधिकारिक हैंडओवर के लिए पीएम नरेंद्र मोदी, भारत सरकार और भारत के लोगों को उनकी पड़ोसी भावना और उदारता के लिए मेरा ईमानदारी से धन्यवाद।”

कर्ज जाल कूटनीति में विश्वास रखने वाले चीन के विपरीत भारत ने भुगतान को लेकर ट्रेजरी बिल की अवधि 10 साल रखी है। कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए मार्च में भारत ने चिकित्सकों और विशेषज्ञों का एक दल मालदीव (Maldives) भेजा था। इसके बाद अप्रैल में 5.5 टन जरूरी दवाओं की खेप भी मदद के रूप में भेजी थी। इसके अलावा मई में भारतीय वायु सेना ने 6.2 टन दवाएं और 580 टन खाद्य पदार्थ मालदीव पहुंचाये थे।

मालदीव ने अब्दुल्ला यामीन के शासन में चीन समर्थक रुख अपनाया था। हालांकि, यामीन के पतन के साथ, मालदीव के संबंध भारत के साथ तेजी से मजबूत हुए हैं । कई अवसरों पर तो मालदीव ने इस्लामिक देशों के संगठन OIC में पाकिस्तान के भारत विरोधी चालों को नाकाम भी किया है।

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