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18 October 2020

तुर्की रूस के S400 को रूस के खिलाफ ही इस्तेमाल कर सकता है- यह एर्दोगन की सबसे बड़ी गलती होगी

 


लगता है तुर्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के धैर्य की परीक्षा लेने का मन बना लिया है। यही कारण है कि अब Nagorno-Karabakh के बाद रूस की नाक के नीचे यूक्रेन में भी तुर्की ने रूस-विरोधी गतिविधि को तेज कर दिया है। बीते शुक्रवार को अंकारा में राष्ट्रपति एर्दोगन और यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenkskiy के बीच ना सिर्फ बड़ा सैन्य समझौता हुआ, बल्कि दोनों देशों के प्रमुखों ने जल्द ही 10 बिलियन डॉलर की एक ट्रेड डील को पक्का करने की घोषणा भी की। इस दौरान एर्दोगन ने रूस को उकसाते हुए यह तक कह डाला कि तुर्की कभी रूस द्वारा Crimea पर किए गए अवैध कब्जे को मान्यता प्रदान नहीं करेगा। Nagorno-Karabakh क्षेत्र में रूस के साथ सीधे टकराव के दौरान तुर्की ने रूस के खिलाफ एक और मोर्चा खोलने का जोखिम उठाया है, लेकिन यह एर्दोगन के जीवन की सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।

बता दें कि अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार तुर्की रूस के प्रभाव वाले मध्य एशिया के देशों पर अपनी निगाहें टिकाये बैठा है। इसी कड़ी में उसने अर्मेनिया-अज़रबैजान विवाद में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने का फैसला लिया है। अज़रबैजान का समर्थन करने के पीछे तुर्की का सबसे बड़ा मकसद यही है कि कैसे भी करके तुर्की और अज़रबैजान के बीच जमीनी संपर्क हो सके और तुर्की इस देश से gas आयात कर सके। हालांकि, यहाँ तुर्की के अरमानों पर पानी फेरने के लिए रूस तैयार खड़ा है, जिसने अर्मेनिया का भरपूर समर्थन करने का ऐलान किया है। इतना ही नहीं, तुर्की की मीडिया तो यह भी आरोप लगा रही है कि रूस ईरान की सहायता से अपने हथियार अर्मेनिया तक पहुंचा रहा है। Daily Sabah के मुताबिक “ईरान खुद अपने तेल टैंकरों को विवादित Nagorno-Karabakh क्षेत्र में भेज रहा है, जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।”

ऐसे में अब तुर्की ने भी रूस को घेरने के लिए “यूक्रेन कार्ड” खेलने का फैसला लिया है। तुर्की ने ऐलान किया है कि वह यूक्रेन के साथ मिलकर एक एयरक्राफ्ट को विकसित करने पर काम कर रहा है। इसके अलावा पिछले साल ही यूक्रेन ने तुर्की से drone खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। Black sea क्षेत्र में रूस के प्रभाव को चुनौती देने के लिए ही तुर्की ने यूक्रेन के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया है। यही कारण है कि Crimea के मुद्दे पर भी तुर्की खुलकर रूस के कट्टर विरोधी यूक्रेन के समर्थन में आ गया है। एर्दोगन ने बीते शुक्रवार को एक बयान देते हुए कहा “हमने शुरू से ही यूक्रेन की संप्रभुता का सम्मान किया है और आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे। हम रूस द्वारा Crimea पर किए गए अवैध कब्जे को मान्यता प्रदान नहीं करेंगे। यूक्रेन क्षेत्र में शांति का सबसे बड़ा रखवाला है।”

एर्दोगन का दुस्साहस देखिये, जिस दिन तुर्की के राष्ट्रपति ने यह बयान दियाम ठीक उसी दिन तुर्की की मीडिया ने यह भी पुष्टि कर दी कि तुर्की ने पहली बार रूसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस400 का एक सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण के बाद बेशक अमेरिका की ओर से बेहद तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, लेकिन यहाँ इस परीक्षण की timing पर ध्यान दिया जाये, तो यह समझ में आता है कि तुर्की ने रूस के लिए भी एक बड़ा संदेश दिया है।

अब अगर इस तनाव के बीच Nagorno-Karabakh क्षेत्र में कोई तनाव बढ़ता है और इन दोनों ताकतों के बीच युद्ध की स्थिति बनती है, तो ऐसा भी हो सकता है कि ये दोनों ही देश एक दूसरे के खिलाफ S400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती कर दें, लेकिन क्या यह रूस के लिए आत्मघाती नहीं होगा? इसका उत्तर है- हाँ!

अभी तुर्की के पास S400 की सिर्फ 4 batteries मौजूद हैं, जिनमें कुल मिलाकर 192 से ज़्यादा मिसाइलें हैं। इन मिसाइलों के साथ शायद ही तुर्की रूस का कुछ बिगाड़ पाये, क्योंकि रूस तो खुद इन मिसाइलों का निर्माता है और वह किसी भी सूरत अपने ही मिसाइल सिस्टम को अपने खिलाफ इस्तेमाल होने नहीं देगा! एस400 के कारण अभी अमेरिका और तुर्की के रिश्तों में तनाव देखने को मिल चुका है, लेकिन अभी एस 400 के कारण रूस भी तुर्की का सबसे बड़ा दुश्मन बनकर सामने आ सकता है। ऐसे में रूस के खिलाफ तुर्की की यह आक्रामकता लंबे समय में उसके लिए बेहद घातक साबित हो सकती है।

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