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07 October 2020

Inside Story- बार-बार सीएम नीतीश पर निशाना क्यों? ये है चिराग पासवान की सियासी गणित

 

Inside Story- बार-बार सीएम नीतीश पर निशाना क्यों? ये है चिराग पासवान की सियासी गणित

लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के तल्ख तेवर तता पार्टी की ओर से कही जा रही इन दो बातों पर गौर करें, पहला मोदी से बैर नहीं, नीतीश तुम्हारी खैर नहीं, दूसरा हम भाजपा के साथ सरकार बनाएंगे, इससे जाहिर है कि बीजेपी के साथ रहने तथा सीएम नीतीश कुमार को टारगेट कर चिराग पासवान जिस तरह के बयान दे रहे हैं, उससे भविष्य की सियासत के कई संकेत मिल रहे हैं, राजनीतिक जानकार बताते हैं कि बिहार की सियासत के मद्देनजर चिराग पासवान कुछ खास योजना के साथ आगे बढ रहे हैं।

नीतीश के नेतृत्व को नकारा
हाल ही में लोजपा अध्यक्ष ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व को पहले नकार दिया, फिर एक खुला पत्र लिखा, 
Nitish kumar
जिसमें उन्होने पिता को याद करते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट की सोच को मिटने नहीं दूंगा, ये फैसला बिहार पर राज करने के लिए नहीं बल्कि नाज करने के लिये लिया गया है, जाहिर है कि ये उनके बिहार की राजनीति को अपने तरीके से डील करने की एक पहल मानी जा रही है।

नीतीश के विकल्प के रुप में खुद को पेश करने की कोशिश
एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि चिराग पासवान ने बिहार चुनाव में एनडीए का हिस्सा बने रहते हुए अलग चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, 
ये जाहिर तौर पर सीधे नीतीश कुमार को नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन इससे भी बड़ी तस्वीर ये है कि चिराग 2025 विधानसभा चुनाव को टारगेट लेकर चल रहे हैं, जिसमें वो भविष्य में सीएम नीतीश के विकल्प के तौर पर उभर सकें।

पार्टी का अलग अस्तित्व कायम रखने की रणनीति
साल 2017 में मणिपुर विधानसभा चुनाव में लोजपा ने बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ा था, बाद में लोजपा सरकार में शामिल हो गई, 
इसके बाद 2019 झारखंड विधानसभा चुनाव में भी एनडीए से अलग होकर लड़ा, हालांकि उन्हें हासिल वोटों का प्रतिशत बेहद कम था, लेकिन चिराग ने इस फैसले से पार्टी के अलग अस्तित्व का एहसास तो जरुर करवाया था।

बीजेपी-नीतीश नहीं तो राजद के साथ समीकरण
बिहार में बीजेपी के साथ और जदयू के खिलाफ लड़ने की बात कहने वाले चिराग अकसर तेजस्वी यादव को छोटा भाई बताते हैं, हाल ही में उन्होने जदयू के खिलाफ 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया, फिर तेजस्वी यादव को छोटा भाई बता दिया, 
तो सियासत को समझने वाले इस संकेत को भांप गये, समीक्षकों का कहना है कि चिराग राजद के साथ एक विकल्प को हमेशा खुला रखना चाहते हैं।

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