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27 October 2020

तुर्की ने फ्रांस से पंगा क्या लिया, पूरा EU अब एर्दोगन की बखिया उधेड़ने की तैयारी कर चुका है


 तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन अपने देश में राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देकर अपनी कुर्सी को बचाना चाहते हैं। हालांकि, उनके हालिया कदम उनके देश के लिए बेहद घातक साबित हो रहे हैं। उदाहरण के लिए “कट्टरपंथी इस्लाम” के खिलाफ मोर्चा खोल चुके फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron को हाल ही में एर्दोगन ने “दिमाग से पागल” घोषित कर दिया, जिसके बाद गुस्से में फ्रांस ने अंकारा से अपने राजदूत को वापस बुला लिया। हालांकि, तुर्की के लिए समस्या तब बढ़ गयी जब EU ने भी खुले तौर पर फ्रांस का समर्थन कर दिया और तुर्की को इसका अंजाम भुगतने की धमकी दे डाली।

फ्रांस में बीते दिनों हुए आतंकवादी हमले में एक टीचर की हत्या के बाद Emmanuel Macron कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में उन्होंने इस्लाम को “religion in crisis” कहकर संबोधित किया था। इतना ही नहीं, विवादित कार्टून के मुद्दे पर Macron ने एक साहसिक बयान में कहा था “वे इन cartoons की निंदा नहीं करेंगे।” बता दें कि prophet Mohammad की आकृति बनाना इस्लाम में हराम माना जाता है, ऐसे में फ्रांस के राष्ट्रपति के इस बयान की पाकिस्तान और तुर्की जैसे देश खुलकर निंदा कर रहे हैं। इसी कड़ी में एर्दोगन ने Macron को दिमाग से पागल घोषित कर उन्हें इलाज़ कराने के लिए कहा!

हालांकि, फ्रांस के साथ-साथ ईयू को भी एर्दोगन की ये टिप्पणी पसंद नहीं आई। रविवार को EU के विदेश नीति के अध्यक्ष Josep Borrell ने एक ट्वीट कर लिखा “एर्दोगन की ये भद्दी टिप्पणी अस्वीकार्य है, तुर्की को जल्द ही इस टकराव से बचने के लिए कदम उठाना होगा।” इसी प्रकार European Council के अध्यक्ष Charles Michel ने कहा “पहले तुर्की ने भू-मध्य सागर में विवाद भड़काया और अब वह सीधा बदतमीज़ी पर उतर आया है।” साथ ही EU के सदस्य देश पहले ही तुर्की को दिसंबर तक का समय दे चुके हैं और अगर तब तक तुर्की के बर्ताव में कोई बदलाव नहीं आता है, तो EU की ओर से तुर्की पर प्रतिबंधों का ऐलान भी किया जा सकता है।

फ्रांस की कट्टरपंथी इस्लाम विरोधी लड़ाई में बेशक तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश रोड़ा अटकाने की फिराक में हो, लेकिन स्पष्ट है कि EU अब फ्रांस के समर्थन में एकजुट हो चुका है। उदाहरण के लिए डच प्रधानमंत्री Mark Rutte खुलकर फ्रांस का समर्थन करने की बात कह चुके हैं। इसी के साथ-साथ जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास भी “कट्टरपंथी इस्लाम विरोधी लड़ाई” में फ्रांस का साथ देने की घोषणा कर चुके हैं। भू-मध्य सागर मुद्दे पर तुर्की के साथ हमेशा तनाव में रहने वाले ग्रीस और साइप्रस जैसे देशों ने भी खुलकर एर्दोगन पर निशाना साधा है। ग्रीस के राष्ट्रपति Katerina Sakellaropoulou ने एक बयान में कहा “एर्दोगन यूरोप में धार्मिक टकराव को बढ़ा रहे हैं, यह असहिष्णुता बिलकुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

बता दें कि तुर्की पिछले कुछ समय से EU में शामिल होने के लिए हाथ-पैर मार रहा है, लेकिन फ्रांस और अन्य EU के सदस्य देशों से टकराव के बाद अब इस मुद्दे पर बातचीत टलने के आसार बढ़ गए हैं। वर्ष 2005 से ही तुर्की और EU के बीच इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक इसका कोई नतीजा नहीं निकला है। तुर्की ने अपने यहाँ फ्रांस के सामान का बहिष्कार करने का भी ऐलान किया है, जिसके ठीक एक दिन बाद ही तुर्की का stock exchange औंधे मुंह गिर गया और सिर्फ दो दिन के अंदर तुर्की को करीब 7.2 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।

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