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05 October 2020

CCP में गृह युद्ध छिड़ने वाला है? चीन के पूर्व उपराष्ट्रपति पर हुई कार्रवाई इसी ओर इशारा कर रही है

 


चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर कोरोनावायरस के बाद से ही गंभीर आरोप लगने लगे थे। उनके खिलाफ जनता में विरोध की आग पहले ही काफी भड़क चुकी थी और अब उनकी ही पार्टी में उनके खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं। चीन के ही राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के  नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। जिनपिंग के ही करीबी माने जाने वाले एक शख्स पर पहले कार्रवाई और अब उनका विरोधी हो जाना दिखाता है कि चीन में न केवल जिनपिंग के प्रति असंतोष है बल्कि ये भविष्य में चीन को एक गृहयुद्ध की ओर ले जा सकता है, और इसीलिए जिनपिंग अब किसी पर भी कार्रवाई कर सकते हैं।

हालिया रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सरकार का एक सीनियर इन्सपेक्टर डॉन्ग हॉन्ग भ्रष्टाचार के गंभीर आऱोपों का दोषी है और इसके चलते उसको लेकर उच्च स्तरीय जांच की जा रही है। गौरतलब है कि हॉन्ग चीनी उप-राष्ट्रपति के काफी करीबी हैं जिसके कारण इस मामले को काफी अहम माना जा रहा है। प्रशासन द्वारा इस मामले मे कार्रवाई करना ये दिखाता है कि सीसीपी जनरल सेक्रेटरी अब उन सभी को निशाना बनाएंगे, जिन पर उन्हें विश्वास नहीं है।

2012 में सत्ता में आने के बाद से ही चीनी राष्ट्रपति का लक्ष्य था कि वो भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत 1.3 मिलियन भ्रष्टाचारी अधिकारियों को सीधा निशाना बनाएंगे। गौरतलब है कि चीन में हॉन्ग जिनपिंग प्रशासन के पहले काफी लंबे वक्त तक एक सीनियर अधिकारी के पद पर कार्यरत थे और वो चीन की भ्रष्टाचार रोधी कमेटी का नेतृत्व कर रहे थे। अब वो उसी कमेटी के निशाने पर है जिसका वो कभी नेतृत्व कर रहे थे। सीसीडीआई ने हॉन्ग को लेकर अपने एक लाइन के बयान में कहा, चीन के गंभीर नियमों के उल्लंघनों के कारण वो संदिग्ध हैं और गिरफ्तार किए गए हैं।

चीनी मीडिया द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक हॉन्ग जिनपिंग के करीबी थे। 2018 तक वो उपाध्य़क्ष के पद पर ही थे पर उनके खिलाफ जिनपिंग प्रशासन द्वारा ये कार्रवाई करना दिखाता है कि जिनपिंग को अब अपने ही सहयोगियों पर भरोसा नहीं रहा है और इसीलिए वो अब करीबियों को भी अपना निशाना बना रहे हैँ। जिनपिंग लगातार अपने करीबियों पर भरोसा खो रहे हैं। हालांकि ,चीन के लिए ये एक सामान्य सी घटना है क्योकि चीन में सीसीपी औऱ उसके नेता इन्हीं कामों के लिए जाने जाते हैं।

पिछले 8 से 9 महीने चीन और वहां की सरकार के लिए बेहद मुश्किलों भरे रहे हैं। पहले उन्हें कोरोनावायरस के कारण पूरी दुनिया में कूटनीतिक मार पड़ी, तो वहीं आर्थिक मोर्चे पर औऱ आंतरिक विरोध सीसीपी समेत पूरे चीन के लिए एक मुसीबत का सबब बना है। चीनी सेना औऱ सरकार पहले ही भारत से सीमा विवादों के कारण अपनी भद्द पिटा चुकी है और उसकी पीएलए को भारतीय सेना द्वारा बुरी मार पड़ी है। ऐसे में चीन के लिए हर तरफ से इस दौरान बुरी खबरें ही आईं हैं। इसके अलावा चीन को दक्षिण चीन सागर पर जापान, वियतनाम औऱ पूर्वी चीन सीगर पर चुनौतियां भी मिल रही हैं जो उसे परेशान ही कर रहीं हैं क्योंकि चीन इसका कोई ठोस हल नहीं निकाल पा रहा है।

शी जिनपिंग को आर्थिक मोर्चे से लेकर हॉन्ग कॉन्ग तक के मुद्दे पर वैश्विक बेइज्जती का सामना करना पड़ा है। इन सभी को लेकर चीन में उनकी ही पार्टी मे आंतरिक विरोध की स्थितियां बन गईं हैं जिससे चीनी राष्ट्रपति की गरिमा को तगड़ा झटका लगा है। वो पूरी सख्ती के साथ पार्टी को नियंत्रित कर रहे हैं और उनके इस रवैए के चलते ही पार्टी में उनकी लोकप्रियता को बट्टा लगा है। इसके कारण ही उन्हें चीन का माफिया बॉस कहा जाता है।

अपने आप को असुरक्षित पाता देख जिनपिंग कुछ भी कर सकते है और इसके चलते गृहयुद्ध की बनी स्थितियों के बीच चीन में जिनपिंग अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को किस तरह दबा रहे उसका उदाहरण डॉन्ग हॉन्ग पर हुई कार्रवाई ही है।

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