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06 October 2020

रेप या ऑनर किलिंग? जातिवाद का एंगल है भी या नहीं? हाथरस मामला सच्चाई से कोसो दूर


हाथरस का मामला इन दिनों देश में चर्चा का विषय बना हुआ है पर इस मामले में कई ऐसे सवाल हैं जो इस मामले को और उलझा रही है। कुछ रिपोर्ट्स इसे रेप के मामला बता रहीं तो कुछ इसे ऑनर किलिंग का मुद्दा बना रहे। हद तो तब हो गयी जब पीड़िता के अंतिम संस्कार को लेकर भी मीडिया में दो तरह की रिपोर्ट्स देखीं गयीं। अब बात जब सीबीआई जांच तक पहुंची है तो इसमें भी पेंच है और तो और इसे जातिवाद का रंग देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी गयी है। वहीं इस मामले मे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने और दंगे फैलाने को लेकर भी एक नया खुलासा हुआ है जिसने मामले को हद्द से ज्यादा पेचीदा बना दिया है वहीं, इस पर हो रही राजनीति केस को और अधिक उलझा रही है।

जिस बात को लेकर सबसे ज्यादा हंगामा हो रहा है, फॉरेन्सिक जांच में तो उस बात को ही खारिज कर दिया गया है। दरअसल, इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक आगरा की फॉरेन्सिक टीम ने अपनी जांच की रिपोर्ट में कहा है कि लड़की के साथ कोई रेप नहीं हुआ था औऱ उसकी बॉडी मे कोई सीमेन नहीं मिला है जो साबित कर सके कि रेप हुआ है। इस रिपोर्ट में यौन शोषण की बातों को सिरे से खारिज किया गया है। वहीं इस मामले में पुलिस ने ये भी कहा है कि लड़की ने भी बलात्कार की बातों को नकारते हुए मारपीट की बात कही है।

गौरतलब है कि गांव के पंचायत के लोग भी इसे रेप नहीं, बल्कि एक ऑनर किलिंग बता रहे है और इसे आपसी रंजिश का मामला बता कर रेप की घटनाओं को सिरे से खारिज कर रहे हैं। यदि गांववालों की बातों में सच्चाई है ये मुद्दा जातिवाद का है ही नहीं तो फिर जानबुझकर पूरी जांच न होने से पहले इसे जातिवाद का रंग दिया जाना एक बड़ी साजिश की ओर भी इशारा करता है। गांव वालों के ऐसे बयान इस केस को और अधिक पेचीदा बना रहे हैं। इन सबसे इतर आज तक न्यूज चैनल एक दूसरी जांच का हवाला देते हुए कह रहा है कि रेप हुआ है जिसके पीछे ये तर्क दिया है कि पीड़िता मारपीट के बाद अपनी सुध-बुध खो चुकी थी। साथ ही कम्पलीट पेनीट्रेशन की बात कही गई है। दूसरी ओर एएमयू की इस रिपोर्ट को पुलिस प्रशासन सिरे से खआरिज कर रहा है जो मामले को उलझा रहा है।

यूपी पुलिस को लेकर ये आरोप है कि पुलिस ने जबरदस्ती रात में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। जबकि पुलिस का इस मामले में पक्ष ये है कि पीड़िता के परिजनों ने ही शव को मुखाग्नि दी है । लाइव हिन्दुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता के परिवारवालों के साथ जबरदस्ती की गई और उसके अंतिम संस्कार के दौरान भाई, मां-पिता कोई भी मौजूद नहीं थे। जबकि पुलिस इन सभी बातों को नकार रही है। पुलिस का कहना है कि उसने पूरे रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कराया था।

इसके अलावा योगी सरकार पर इस केस को लेकर लापरवाही के नाम पर लगातार आरोप लगते रहे हैं जिसके चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केस की जांच सीबीआई से कराने की बात कह दी है।  इसके बाद पीड़ित परिवार ने एक नया ही रुख अपनाते हुए सीबीआई जांच से इंकार कर दिया, जिससे उनके प्रति भी लोगों में कई धारणाएं बन गई हैं। लोगों के मन में ये एक बात जरूर उठी है कि देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के लिए ये परिवार ऐसी बातें क्यों कर रहा है।

इसके अलावा सरकार को लेकर भी ये धारणाएं चलाई जा रही हैं कि सरकार दलित विरोधी गतिविधियों में लिप्त है। इसी बीच इस कांड के जरिये दंगा करवाने का खुलासा मामले को एक नए और हाई वोल्टेज मुकाम पर ले गया है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट इस तरफ इशारा कर रही है कि इस एक केस के जरिए योगी सरकार की छवि को धूमिल करने की राजनीतिक प्लानिंग भी की जा रही है। इन बातों को लेकर योगी भी गिद्ध प्रवृत्ति के राजनेताओं पर हमला बोल चुके हैं।

इस पूरे मामले को लेकर जितनी रिपोर्ट हैं उतने ही नए तथ्य सामने आ रहे हैं और ये सारे तथ्य केस को हर ढलते दिन के साथ उलझा रहे हैं। राजनेता से लेकर मीडिया तक सभी अलग-अलग तरह के कयास ही लगा रहे है लेकिन कोई भी अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है औऱ जो पहुंच रहा है असल में वो अपनी राजनीतिक दुकान का शटर खोलकर बैठा हुआ है।

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