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27 October 2020

तुर्की को फ्रांस का बहिष्कार करना पड़ गया भारी, अपनी ही मुद्रा हुई धराशायी

 


जीवन में एक उसूल निश्चित होना चाहिए – नमक स्वाद अनुसार और अकड़ औकात अनुसार। लेकिन लगता है तुर्की को इस उसूल से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। तभी तुर्की के तानाशाह  रेसेप तैयप एर्दोगन ने बिना सोचे समझे ये हुंकार भरी कि तुर्की को फ्रांस के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करना चाहिए, जिसका खामियाजा अब तुर्की के अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है।

जब से एर्दोगन ने फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रॉन पर मानसिक उपचार कराने का तंज कसा है, और जब से तुर्की ने फ्रेंच उत्पादों के बहिष्कार का नारा दिया है, तब से तुर्की की मुद्रा और अर्थव्यवस्था, दोनों के ही लेने के देने पड़ गए हैं। उदाहरण के लिए तुर्की की मुद्रा लीरा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरती ही जा रही है और  तुर्की के लीरा के मूल्य में 26.7 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। विश्वास नहीं होता तो इस ग्राफ को ही देख लीजिए –

परंतु तुर्की के तानाशाह ने ऐसा क्या कहा कि तुर्की की अर्थव्यवस्था को लेने के देने पड़ गए? दरअसल, फ्रांस में एक कट्टरपंथी मुसलमान ने एक फ्रेंच शिक्षक को पैगंबर मोहम्मद के चित्र दिखाने के लिए सर कलम कर दिया, जिसके कारण पूरे फ्रांस में आक्रोश उमड़ पड़ा, और फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रॉन  ने कट्टरपंथी इस्लाम के विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया है, जिसके अंतर्गत युवा से लेके वृद्धजन, सभी फ्रांसीसी नागरिक कट्टरपंथी इस्लाम के विरुद्ध अपने अपने तरीकों से आवाज उठा रहे हैं।

लेकिन यह बात तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष एर्दोगन को नागवार गुजरी, और उन्होंने फ्रांस के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। उन्होंने न केवल मैक्रॉन  को मानसिक उपचार कराने की सलाह दी, बल्कि तुर्की के निवासियों को फ्रेंच उत्पाद के बहिष्कार करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। एर्दोगन के अनुसार, “जैसे फ्रांस में कहा गया है कि तुर्की के उत्पादों का इस्तेमाल मत करो, तो वैसे ही मैं भी अपने मुल्क के निवासियों से कहता हूँ, फ्रांस के उत्पादों का इस्तेमाल मत करो, उन्हे मत खरीदो।”

ये तो वही बात हो गई कि घोड़ागाड़ी चलाने वाले Lamborghini के बहिष्कार के नारे लगा रहा है। एक तो तुर्की के अर्थव्यवस्था के वैसे ही लाले पड़े हुए हैं, अरब जगत उसे घास नहीं डाल रहा, और एर्दोगन चाहते हैं कि उनके देशवासी फ्रेंच उत्पादों का बहिष्कार करें। एर्दोगन के बयानों को तुर्की के अर्थव्यवस्था से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला और तुर्की के स्टॉक एक्सचेंज को भी इस कारण से भारी नुकसान हुआ।

पिछले दो दिनों में तुर्की को स्टॉक मार्केट में 7.2 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। इसके अलावा तुर्की के स्टॉक एक्सचेंज में 3.88 प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज हुई, जो इस समय तुर्की की अर्थव्यवस्था के लिए बिल्कुल भी शुभ संकेत नहीं है –

इसके अलावा तुर्की को अरब जगत द्वारा बहिष्कार का भी सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए गल्फ न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, “सऊदी अरब के चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ने हाल ही में ट्विटर पर किए गए पोस्ट में तुर्की की हर वस्तु के बहिष्कार की मांग की है, चाहे वह आयात हो, निवेश हो, या फिर पर्यटन ही क्यों न हो, और साथ ही में ये भी कहा कि ऐसा करना हर सऊदी नागरिक का कर्तव्य है।” इसके बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि बाकी के अरब देश भी सऊदी के पदचिह्नों पर चलते हुए तुर्की के उत्पादों पर बैन लगा सकते हैं।

ऐसे में तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष एर्दोगन ने फ्रेंच उत्पादों के बहिष्कार की मांग कर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है। जिस प्रकार से तुर्की की अर्थव्यवस्था है, उस समय ऐसा कदम उठाना स्पष्ट जताता है कि तुर्की किस दिशा में जा रहा है। सही कहा था किसी ने, ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि!’

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