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06 October 2020

महाभारत युद्ध से जुड़ा है किन्नरों की शादी का रहस्य, सिर्फ एक रात के लिए बनती हैं सुहागन


किन्नर के बारे में हम सब बचपन से कई सारी बातें सुनते आए हैं। उनसे कई शुभ अवसरों पर मिले भी हैं और हमेशा अपने बड़े-बुजुर्गों को ये कहते सुना है कि, किन्नर की हमेशा दुआ लेनी चाहिए बद्दुआ नहीं। कहते हैं कि, इनकी दुआओं में बहुत असर होता है। पर क्या आप ये जानते हैं कि, किन्नर शादी भी करते हैं। आप सोचेंगे कैसे किन्नर शादी कर सकते हैं क्योंकि वह न तो स्त्री होते है न ही पुरुष फिर शादी कैसे। पर सच यही है कि किन्नर शादी तो करते हैं पर सिर्फ एक रात के लिए उसके बाद शादी तोड़ देते हैं। खास बात ये है कि, इनकी शादी अपने अपने भगवान से होती है।

अपने भगवान से एक रात के लिए शादी करते हैं किन्नर
किन्नर जिस भगवान से शादी करते हैं वह अर्जुन और नाग कन्या उलूपी की संतान इरावन हैं। जिन्हें अरावन के नाम से भी जाना जाता है।

लेकिन, किन्नर से इनकी शादी का संबंध अभी से नहीं बल्कि महाभारत के युद्ध से जुड़ा है।

महाभारत युद्ध से जुड़ा है किन्नरों की शादी का रहस्य
ऐसी कथा है कि, जब महाभारत युद्ध होना था तो उससे पहले पांडवों ने मां काली की पूजा की थी। लेकिन, पूजा में एक राजकुमार की बलि होनी थी। बलि का नाम सुन जब कोई राजकुमार आगे नहीं तो इरावन ने आगे आकर कहा कि, वह बलि के लिए तैयार है पर उसकी एक शर्त है। सबके पूछने पर उसने बताया कि, वह बिना शादी के बलि नहीं चढ़ेगा। अब इरावन की ये शर्त सुन सब हैरान रह गए। हर कोई सोचने लगा कि, ऐसी कौन-सी राजकुमारी है जो एक दिन के लिए शादी करेगी फिर विधवा हो जाएगी।

पांडवों के पास ये बहुत बड़ी समस्या थी। उस वक्त भगवान श्री कृष्ण खुद मोहिनी रूप धारण करके प्रकट हो गए और इरावन से शादी रचा ली। शादी के अगले दिन ही इरावन की बलि दे दी गई। श्री कृष्ण ने इरावन की विधवा बनने के बाद खूब विलाप किया। इसी कथा और घटना को याद कर अब किन्नर एक रात के लिए अपने भगवान इरावन से शादी करते हैं और फिर अगले दिन विलाप करते हैं।

तमिलनाडु के कूवगाम में होता है किन्नर की शादी का जश्न
कथा जानने के बाद हम आपको ये बताते हैं कि, आप इनकी शादी का जश्न देखने कहां जा सकते हैं। इसके लिए आपको तमिलनाडु के कूवगाम जाना होगा। यहां पर तमिल नव वर्ष की पहली पूर्णिमा से किन्नरों के विवाह का उत्सव पूरे हर्षोल्लास के साथ शुरु होता है। खास बात ये है कि, ये उत्सव हर साल होता है जो पूरे 18 दिनों तक चलता है। उत्सव के 17वें दिन किन्नरों का विवाह होता है पूरे 16 श्रृंगार के साथ किन्नर तैयार होते हैं इसके बाद पुरोहित इन्हें मंगलसूत्र पहनाते हैं इसी तरह इनका विवाह इनके भगवान के साथ हो जाता है।
शादी के अगले दिन इरावन भगवान की मूर्ति को पूरे शहर में घुमाया जाता है। फिर तोड़ दिया जाता है। जैसे ही मूर्ति तोड़ी जाती है तुरंत किन्नर अपना श्रृंगार उतारकर एक विधवा बनकर विलाप करने लगती हैं।

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