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19 October 2020

हताश होकर पप्पू यादव ने खा ली थी नींद की गोलियां, बेहद दिलचस्प है दो पूर्व सांसदों की लव स्टोरी

 

हताश होकर पप्पू यादव ने खा ली थी नींद की गोलियां, बेहद दिलचस्प है दो पूर्व सांसदों की लव स्टोरी

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार कई दिग्गज अपना किस्मत आजमा रहे हैं, कुछ लोग बड़ी पार्टियों से चुनावी दंगल में हैं, तो कुछ अपनी खुद की पार्टी से बिहार के सिंहासन तक पहुंचना चाह रहे हैं, ऐसे ही एक शख्स बिहार के पूर्व बाहुबली सांसद पप्पू यादव हैं, जिन्होने कोरोना काल में लोगों की काफी मदद की, इस बार वो अपनी जन अधिकार पार्टी के साथ चुनावी मैदान में हैं, बिहार के सीएम उम्मीदवार भी हैं, ऐसे में आज हम आपको पप्पू यादव की निजी जिंदगी के बारे में बताते हैं।

जमींदार परिवार में जन्म
राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का जन्म धनी जमींदार परिवार में हुआ था, साल 1991 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत पटना के बांकीपुर जेल में बंद पप्पू यादव के लिये वो समय मानो उनके जीवन का सबसे सुखद पहलू लेकर आया, आज भी उन दिनों की बातें याद कर पप्पू यादव का चेहरा खिल उठता है। एक अखबार से बातचीत में पप्पू यादव ने बताया कि मैं रंजीत जी को जितना शुक्रिया अदा करूं वो कम है, तीन साल तक हमारी दोस्ती चटली, उन्होने मेरे प्यार को समझा, तमाम संघर्षों में मेरे साथ थी, हमारा प्रेम प्रसंग फरवरी 1992 से शुरु हुई, हमने 1994 में शादी की, वो दौर बेहद संघर्ष भरा था, तब एक-दूसरे से मिलना जुलना भी मुश्किल था, पटना आना-जाना तो बहुत बड़ी बात थी, मैं खुशनसीब हूं कि मुझे बहुत अच्छी पत्नी मिली है।

आसान नहीं था प्यार की जंग
पहली बार पढने पर तो एहसास होता है कि पप्पू यादव के लिये रंजीत रंजन का प्यार पाना आसान रहा होगा, लेकिन ऐसा नहीं था, उन्हें अपने प्रेम को पाने के लिये बहुत पापड़ बेलने पड़े थे, शायद आपको हैरानी होगी, लेकिन रंजीत ने पहली बार में पप्पू यादव के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, हालांकि पप्पू यादव ने हार नहीं मानी, उन्होने रंजीत से इतना कहा था कि उनके जिंदगी की पहली और आखिरी लड़की वहीं हैं।

यू शुरु हुई थी लव स्टोरी
पटना के बांकीपुर जेल में बंद पप्पू यादव थे, उस दौरान वो अकसर जेल अधीक्षक के आवास से लगे मैदान में लड़कों को खेलते देखा करते थे, इन्हीं लड़कों में रंजीत के छोटे भाई विक्की भी थे, धीरे-धीरे खेलने वाले लड़कों के साथ-साथ पप्पू यादव की नजदीकी बढने लगे, इसी क्रम में एक बार पप्पू ने विक्की के फैमिली एलबम में टेनिस खेलते रंजीत की तस्वीर देखी, पहली नजर में ही उन्हें दिल दे बैठे, जेल से छूटने के बाद रंजीत से मिलने के लिये पप्पू अकसर उस टेनिस क्लब पहुंच जाते थे, जहां वो टेनिस खेलती थी, पप्पू की ये सब आदतें रंजीत को अच्छी नहीं लगती थी, उन्होने कई बार मिना किया, मिलने से रोका और कठोर शब्द भी कहे, लेकिन पप्पू यादव डटे रहे, एक बार तो रंजीत ने यहां तक कह दिया कि वो सिख है और पप्पू हिंदू, उनके परिवार के लोग इस रिश्ते को नहीं मानेंगे।

हताश होकर खा ली थी नींद की गोलियां
रंजीत रंजन के व्यवहार से हताश होकर पप्पू यादव ने ढेर सारी नींद की गोलियां खा ली थी, जिसके बाद उन्हें पीएमसीएच में भर्ती कराया गया, इस बारे में उन्होने अपनी किताब द्रोहकाल रका पथिक में भी विस्तार से बताया है, इस घटना के बाद रंजीत का व्यवहार बदलने लगा, लेकिन दोनों की राहें अभी भी आसान नहीं थी, पप्पू के परिवार से इस शादी के लिये कोई समस्या नहीं थी, लेकिन रंजीत रंजन के पिता ग्रंथी थे, और शुरु से ही इस रिश्ते के खिलाफ थे, ऐसे में पप्पू यादव के बहन-बहनोई रंजीत के परिवार को मनाने के लिये चंडीगढ गये, फिर भी बात नहीं बनी, तमाम कोशिशों के बाद हर बार हताशा मिली, जिससे पप्पू निराश हो गये।

कांग्रेस नेता ने की मदद
अपनी किताब में पप्पू यादव ने लिखा है कि किसी ने उन्हें कांग्रेस नेता एसएस अहलूवालिया से मिलने की सलाह दी, उस शख्स ने कहा कि अहलूवालिया जी आपकी मदद कर सकते हैं, ऐसे में पप्पू यादव तुरंत उनसे मिलने के लिये दिल्ली पहुंचे, आखिरकार आहलूवालिया साहब के पहल से रंजीत के परिजनों को मनाने में मदद मिली, आखिरकार शादी की तैयारी हुई, फरवरी 1994 में दोनों की शादी हो गई।

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