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03 October 2020

हाथरस की घटना में इंसाफ के बहाने खुद की खोई हुई जमीन तलाश रही है कांग्रेस

 

लखनऊ। देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश खास मायने रखता है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस का कभी गढ़ माना जाता था। लेकिन क्षेत्रीय दलों के बढ़ते प्रभुत्व के सामने कांग्रेस का जनाधार खो गया। हालत यह है कि कांग्रेस का घर माने जाने वाला अमेठी व रायबरेली में भी भाजपा ने सेंधमारी कर ली। लोकसभा चुनाव 2019 में राहुल गांधी को अपनी पारंपरिक संसदीय सीट अमेठी से हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में कांग्रेस को अपने खोए वजूद को पाने की छटपटाहट समझा जा सकता है। पार्टी कार्यकर्ताओं की मांग पर प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। लेकिन बीते चुनाव में कांग्रेस को इसका कोई लाभ नहीं मिल सका। हालांकि प्रियंका गांधी हर उस मौके की तलाश में लगी हुई है जिससे कांग्रेस का खोया हुआ वजूद फिर से मिल सके।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का पूरा फोकस यूपी पर है। शायद यही वजह है कि कोरोना संकट के दौरान जारी लाकडाउन के बीच जहां पूरा देश कई तरह के संकट से जूझ रहा था वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा को सारा संकट उत्तर प्रदेश में ही नजर आ रहा था। वह मजदूरों का हो रही दिक्कत को लेकर लगातार ट्वीट कर योगी सरकार पर हमला बोल रही थीं। हालांकि मजदूरों को उनके घर छोड़ने के लिए कांग्रेस की तरफ से एक हजार बसों के प्रबंध किए जाने के दावों का योगी सरकार ने हवा निकाल दी थी। प्रदेश सरकार को कांग्रेस की तरफ से लगाई गई बसों की जो सूची सौंपी गई थी, उसमें आटो, स्कूटर तक के नंबर शामिल थे। अब कांग्रेस हाथरस की घटना को भुनाने की पूरी कोशिश में लगी हुई है। इसी के तहत राहुल गांधी व प्रियंका गांधी पूरे काफिले के साथ पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उनके काफिले को गांव तक जाने की नहीं दिया। इसके बाद ​प्रियंका व राहुल समर्थकों के साथ पैदल ही पीड़िता के गांव के लिए निकल पड़े। इस दौरान पुलिस ने जब उनको रोकने की कोशिश की तो कांग्रेसी नेताओं की साथ उनकी झड़प हो गई। पुलिस के साथ धक्का—मुक्की के बीच राहुल गांधी का सड़क पर गिरने का अंदाज काफी ही मनोरम रहा।

हाथरस की घटना में कांग्रेस को उम्मीद नजर आ रही है। क्योंकि यह वह समाज है जो कभी कांग्रेस का वोट बैंक रहा है। लेकिन बसपा ने कांग्रेस से इन्हें छीन लिया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान ये लोग भाजपा के खेमे में आ गए। मगर मौजूदा समय में इस समाज के लोगों का भाजपा से मोह भंग हो चुका है। ऐसे में कांग्रेस के पास इन लोगों के विश्वास जीतने का मौका है। क्योंकि इस समाज के लोगों को भी पता है कि बसपा के वजूद पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। खैर कांग्रेस इनकों आपने पाले में ला पाने में कितनी सफल होगी यह तो भविष्य के गर्त में है। लेकिन प्रियंका गांधी की तरफ से जो सियासी प्रयास किया जा रहा है, पार्टी को इसका लाभ जरूर मिलेगा।

कांग्रेस उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी बनने की कोशिश में काफी दिनों से लगी हुई है। हाथरस की घटना को लेकर दिल्ली के वाल्‍मीकि में प्रियंका गांधी का जाना एक तीर से कई निशाना लगाने जैसा है। दलित वर्ग की उपजाति वाल्मीकी समाज जो इस समय भाजपा के साथ है उसका अपना वोट बैंक है। यही कारण रहा है कि गांधी जयंती के मौके पर प्रियंका गांधी दिल्ली के वाल्मीकी मंदिर के प्रार्थना में शामिल होकर समाज के लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि संकट के समय में वह उन लोगों के साथ है। कांग्रेस की इस सियासी चालबाजी को देखते हुए यह समझा जा सकता है कि कांग्रेस हाथरस की घटना में इंसाफ के बहाने खुद की खोई हुई जमीन तलाशने में लगी हुई है।

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