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05 October 2020

‘अटल टनल’ ने बढ़ाई चीन की टेंशन, धमकी देते हुए बोला- चीनी सेना मिनटों में कर देगी बर्बाद

 

china on india's atal tunnel

पिछले कुछ दिनों से चीन लगातार भारत के साथ चल रहे विवाद पर दोतरफा बातचीत कर रहा है. एक तरफ तो चीन अंतरराष्ट्रीय मंचों से भारत के साथ शांति की बात करता है तो दूसरी तरफ चीन की सरकारी मीडिया भारत को युद्ध की चेतावनी देती हैं. जी हां, चीन भले ही शांति का राग अलाप रहा है मगर भारत को कई बार सरकारी मीडिया युद्ध की धमकी दे चुकी है. इस बार तो सरकारी मीडिया ने अटल टनल पर चेतावनी दे डाली है. अखबार में लिखी गई बातों से ऐसा लग रहा है जैसे मानो अटल टनल से चीन की टेंशन बढ़ गई हो.

‘अटल टनल’ पर चीन की चेतावनी
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने भारत को धमकी देते हुए कहा कि, हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में बना अटल टनल युद्ध के समय भारत के लिए किसी प्रकार से काम नहीं आएगा क्योंकि चीनी सेना इसे मिनटों पर तबाह कर देगी. मालूम हो अटल टनल का उद्धघाटन हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है.

चीनी सेना कर देगी तबाह
अख़बार ग्लोबल टाइम्स में कहा गया कि, भारत के लिए ये टनल लाभकारी हो सकती है और शांतिपूर्ण स्थिति में बहुत काम आएगी. मगर युद्ध के हालातों में ये टनल भारत के लिए किसी काम नहीं आएगी क्योंकि चाइना पीपल्स आर्मी के पास इस सुरंग को तबाह करने के कई तरीके हैं. इसलिए इस टनल से कोई फायदा भारत को नहीं होने वाला है. इसके आगे अखबार में कहा गया कि, बेहतर यही होगा कि दोनों ही देश शांतिपूर्ण तरीके से रहें.

राजनीतिक प्रोपेगैंडा
सरकारी चीनी मीडिया ने आगे लिखा कि, अभी तो शांति का समय है मगर भारत को इसका अहसास नहीं कि युद्ध की स्थिति में अटल टनल उसके काम नहीं आएगी. चीनी मीडिया ने इस टनल को राजनीतिक प्रोपेगैंडा बताते हुए कहा कि इस टनल से पूरे देश में खुशी की माहौल है और जहां तक भारत के राजनेताओं की है तो वो इसका इस्तेमाल दिखावे और अपने राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं.

उकसावे के काम न करें भारत
अखबार ने आगे लिखा कि, कोई भी सुरंग भारत की लड़ाकू क्षमता में इजाफा नहीं कर सकती क्योंकि भारत और चीन की लड़ाकू क्षमता में निश्चित तौर पर बड़ा फर्क है. भारत चीन की क्षमता से कोसों से दूर है. इसलिए भारत को संयम बरतना चाहिए और उकसावे का कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे हालात खराब हो.

गौरतलब है कि, पीएम मोदी ने अटल टनल का उद्धाघटन करने के बाद संबोधित भी किया था और सुरंग को देश के बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर की नई ताकत बताते हुए कहा था कि, बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर की कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और कई पर काफी तेजी से काम चल रहा है जो बहुत जल्द पूरा हो जाएगा.
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पीएम मोदी के इसी संबोधन के बाद चीनी सरकारी मीडिया का अखबार सामने आया जिसमें भारत को खुली धमकी देने की कोशिश की गई है. अखबार में भारत चीन के साथ सटी सीमा पर सड़कें, पुल और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के बारे में लिखा है और तीन पहलुओं के बारे में बात की है.

चीन के तीन पहलू
चीनी अखबार ने अपने आर्टिकल में लिखा- जिन सड़कों का निर्माण भारत करा रहा है उनका भविष्य तीन व्यावहारिक पहलुओं पर निर्भर करता है. सबसे पहली बात ये कि आखिर भारत सरकार चाहती क्या है. मोदी सरकार को देखकर तो लगता है कि वो सीमा पर सैन्य मौजूदगी को मजबूती देना चाहती है और दूसरा- बजट, भारत लगातार अपने रक्षा बजट में इजाफा कर रहा है और पहले की तुलना इन्फ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा खर्च हो रहा है. तीसरी चीज है तकनीक, इस बारे में अखबार में लिखा- इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में भारत चीन से कोसों दूर है और 73 सड़कों को बनाने की बात 10 साल पहले हुई थी मगर अब तक इन सड़कों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है. जिससे साफ है कि, भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की क्षमता सीमित है और पहाड़ी व दुर्गम इलाकों में सड़क बनाना काफी मुश्किल है.

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