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03 October 2020

चिराग पासवान – वंशवादी राजनीति से इतर एक अलग पहचान स्थापित करता हुआ एक प्रतिभाशाली नेता


 बिहार विधानसभा चुनावों में मुश्किल से एक महीना बाकी है, परंतु अभी भी NDA की दो प्रमुख सहयोगियों लोक जनशक्ति पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) के बीच दरार कम होने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ चिराग पासवान के नेतृत्व में युवा जोश से भरपूर लोजपा JDU पर लगातार हमले कर रही है तो वहीं JDU भी सीट शेयरिंग पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसा लगता है कि चुनाव से पहले NDA में दरार हो कर ही रहेगा और चिराग पासवान एक बड़ा फैसला लेते हुए अकेले चुनाव में उतर सकते हैं।

दरअसल, चुनाव में एक महीने का समय रह गया है लेकिन NDA में टिकट बंटवारा तो दूर अभी तक सहयोगी पार्टियों के बीच सीट बंटवारा तक नहीं हुआ है। लोजपा अभी भी JDU के खिलाफ आग उगलना जारी रखे हुए है। गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित भाजपा के शीर्ष नेताओं ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सीट साझा करने की व्यवस्था के लिए लोजपा प्रमुख चिराग पासवान से दो दिन पहले मुलाकात की थी फिर भी बात नहीं बनी। एलजेपी ने शनिवार यानी 3 अक्टूबर को पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस बैठक में एनडीए के साथ सीट शेयरिंग को लेकर चल रही खींचतान के बीच चिराग पासवान कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

लोजपा के सूत्रों ने कहा कि पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से अपनी शिकायतों को दर्ज कराया और विधानसभा की 243 सीटों में से 143 पर चुनाव लड़ने के लिए अपनी पार्टी के दबावों के बारे में बताया।

चिराग बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मिलने के बाद आश्वस्त नहीं दिख रहे थे। एक वीडियो में उन्हें पार्टी का प्रचार करते हुए देखा जा सकता है कि कोई भी लोक जन शक्ति पार्टी (एलजेपी) के अस्तित्व को चुनौती नहीं दे सकता, हो सकता है कि उनकी मांगों के न पूरा होने से वो NDA से अलग हो कर स्वतंत्र रूप से बिहार के सभी सीटों पर चुनाव लड़े। और फिर जब चुनाव के बाद अच्छी संख्या में सीट जीत कर दोबारा NDA में पोस्ट अलायंस करे जिससे लोजपा की पैठ नीतीश से अधिक रहे।

यदि आप पिछले कुछ महीनों के घटना क्रम को देखे तो चिराग पासवान ने लगातार JDU पर निशाना साधा है। चाहे वो दलितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने पर नीतीश कुमार की आलोचना हो या नीतीश कुमार योजनाओं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना हो। हाल ही में लोजपा के प्रवक्ता असरफ अंसारी ने नीतीश कुमार के महत्वाकांक्षी योजना सात निश्चय को लेकर जेडीयू सरकार पर निशाना साधा और कहा है कि इन योजनाओं की गति बहुत धीमी है। वहीं लोजपा ने कहा है कि राज्य में चिराग पासवान के सपने बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट पर ही बिहार आगे बढ़ सकता है। यानि देखा जाए तो चिराग पासवान अब बिहार में एक बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं जिसकी शुरुआत वे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ कर करना चाहते हैं। यह सही भी है क्योंकि लोजपा अब वो लोजपा नहीं रही है जो रामविलास पासवान के समय की थी। अब की लोजपा चिराग के युवा नेतृत्व में अधिक निर्णायक और धारदार दिखाई दे रही है। पहले लोजपा बैठने से पहले यह इंतज़ार करती थी कि ऊंट किस करवट बैठेगा। परंतु अब ऐसा नहीं है अब चुनाव से पहले ही JDU जैसी पार्टी और नीतीश कुमार को सीधे निशाना बनाना शुरू कर दिया है जिससे नीतीश कुमार भी परेशान दिखाई दे रहे हैं।

इस वर्ष की शुरुआत से ही चिराग पासवान नीतीश सरकार पर हमलावर रहे हैं। कोरोना की टेस्टिंग से ले कर लॉकडाउन द्वारा उत्पन्न प्रवासी संकट से निपटने के लिए नीतीश कुमार की नीतियों और राज्य की कानून-व्यवस्था को चिराग ने आड़े हाथों लिया है।

पासवान ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा था कि, मारे गए अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का उनका फैसला और कुछ नहीं, बल्कि “एक चुनावी घोषणा” है। उनके इस बयान के कारण JDU संगठन में एक भूचाल आया हुआ है। चिराग पासवान के नेतृत्व से पहले LJP बिहार में सिर्फ दलितों की पार्टी मानी जाती थी। लेकिन चिराग के नेतृत्व में LJP का स्वरूप बदल रहा है। चिराग पासवान राज्य तथा देश के विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपना विचार रखते रहे हैं और उनकी छवि एक तेज तर्रार युवा नेता के रूप में उभरी है।

ऐसे में अगर चिराग इस बार के चुनावों से पहले सीट शेयरिंग मुद्दे पर बात न बनने के कारण NDA से बाहर हो कर चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। जाति समीकरणों को पूरा करते हुए यह पार्टी अब युवा जोश से भरपूर है जिससे उसके चुनावों में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। अगर लोजपा 50 से अधिक सीट भी जीतने में कामयाब रहती है तो यह उसके लिए बड़ी कामयाबी होगी और वह वापस NDA में पोस्ट अलायंस कर नीतीश से अधिक पैठ बना कर सरकार में रह सकती है।

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