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17 October 2020

1962 युद्ध में चीन में खदेड़ने के लिए हुई थी तांत्रिक पूजा, जवाहरलाल नेहरू ने किया था महायज्ञ

 

nehru

1962 में भारत और चीन के बीच हुआ युद्ध पूरी दुनिया को याद है। इस युद्ध में भारत ने चीन की हर चाल का मुंहतोड़ जवाब दिया था। सीमा विवाद की वजह से शुरू हुए इस युद्ध में भारतीय सेना के जवानों ने कई दिनों तक चीन का सामना किया। तो वहीं, भारत का दमखम देख चीन की आर्मी भी 11वें दिन पीछे हट गई। 

peeth1264-jpg लेकिन इस युद्ध में एक ऐसा भी समय आया था। जब चीन भारत पर हावी साबित हो रहा था। कहते है इसी दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस युद्ध के लिए तांत्रिक अनुष्ठान का सहारा लिया था। जिसके बाद ही चीनी सेना पीछे हट गई थी।

दरअसल मध्यप्रदेश के झांसी और ग्वालियर के बीच स्थित है दतिया। यह नगर बुंदेलखंड की विरासत के लिए जाना जाता है और यहीं पर है मां पीतांबरा पीठ। पीतांबरा पीठ तांत्रिक अनुष्ठान के लिए काफी माना जाता है। दावा किया जाता है कि 1962 में ज्वाहरलाल नेहरू ने भी यहां आकर तांत्रिक अनुष्ठान किए थे।chiinaजिसके बाद चमत्कार हुआ और चीन के पैर उखड़ गए। 1962 में युद्ध के दौरान एक ऐसा भी समय आया। जब चीन भारतीय सेना पर हावी हो रहा था। बॉर्डर पर हिंसा जारी थी और चीन पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था।

इसी समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पीतांबरा पीठ का ध्यान आया। उन्होंने विराजी मां बगलामुखी के मंदिर में 51 कुंडीय महायज्ञ कराया। कहा जाता है कि तांत्रिक अनुष्ठान का असर हुआ और युद्ध के 11वें दिन चीनी सेना पीछे हट गई। बता दें कि इस पीठ में हुई तांत्रिक अनुष्ठान सिर्फ 1962 में ही नहीं हुए।peeth5-jpgबल्कि देश-विदेश में सरकार बनाने का लिए आज भी नेता यहां पर सिर छुकाते है। देश पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े-बड़े नेता यहां पर दर्शन के लिए आ चुके है। जिसमें विपक्षी पार्टी के नेता राहुल गांधी भी शामिल है।

पीतांबरा पीठ की स्थापना 1935 में स्वामीजी महाराज ने कराई थी। यह पीठ उनके तप की गवाह है। आज दुनियाभर में उनके अनुयायी मौजूद हैं।peeth-jpgपीतांबरा पीठ में विराजी मां बगुलामुखी के दर्शन एक छोटी-सी खिड़की के जरिये होते हैं। नवरात्रों के दिनों में भी इस जगह पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। जिससे साफ है कि यहां कि मान्यता देश-विदेश तक है।

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