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Friday, October 30, 2020

100 करोड़ रुपये की जमीन सरकार द्वारा मात्र 1.98 करोड़ में ली गई, तमिलनाडु में मंदिरों की संपत्ति सरकार के निशाने पर

 


इस दौर में हिंदू समुदाय के मंदिर लगातार राज्य सरकारों के लिए एक बेहद सहज निशाना बन गए हैं जिस पर राज्य सरकारें लगातार अपनी दमनकारी नीतियाँ अपनाते हुए कब्जा जमा लेती हैं। तमिलनाडु का अर्धनारीश्वर मंदिर इसका ही एक उदाहरण है, जिसकी जमीन राज्य सरकार बेहद कम कीमत में हासिल कर चुकी है। ऐसा केवल एक नहीं कई जगह हुआ है तमिलनाडु तो बस हाल का एक वाकया है, जबकि ये किसी और धर्म के साथ सरकार कभी नहीं कर पाती है।

दरअसल, तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक सहयोगी संगठन  हिन्दू मुन्नानी ने बताया है कि राज्य सरकार कल्लाकुरिची इलाके के अर्धनारीश्वर मंदिर की 35 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर इस पर कलेक्ट्रेट ऑफिस बनाने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि हिन्दू धार्मिक और रख-रखाव विभाग द्वारा मंदिर की भूमि को लेकर लगातार अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित किए जा रहे हैं। सरकार पर यह भी आरोप हैं कि 35 एकड़ की इस बेहद कीमती जमीन की कीमत मात्र 1 करोड़ 98 लाख तय की गई है। ये वो आरोप है जिसने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

मुन्नानी द्वारा बताया गया है कि सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार मंदिर की इस 35 एकड़ जमान की कीमत 100 करोड़ से ज्यादा है। ऐसे में वो इसे राज्य सरकार द्वारा एक धोखा-धड़ी बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उस जमीन पर निर्माण कार्य गैर कानूनी है जो कि अभी तक सरकार की नहीं हुई है। लोगों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जनता को इस पुराने मंदिर की जमीन बेचने पर सरकार का विरोध करना चाहिए।

ये बेहद ही आलोचना योग्य बात है कि हिन्दू मंदिरो की देखभाल के लिए बने इस विभाग ने खंडहर हो चुके मंदिरों के रख-रखाव के लिए तो कई ठोस कदम नहीं उठाए, लेकिन ये लोग अब इस बेहद कीमती और पवित्र मंदिर की भूमि को राज्य सरकार को सौंपने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। गौरतलब है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने खुद 23 अक्टूबर को इस कलेक्ट्रेट दफ्तर के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था, जबकि अभी तक ये भूमि राज्य सरकार को नहीं सौंपी गई है।

इस मामले में मंदिर के कार्यकर्ता रंगराजन नरसिम्हन ने कहा, सरकार द्वारा उठाया गया ये कदम एचआर एंड सीई अधिनियम की धारा 34 के तहत पूर्ण रूप से गैरकानूनी है और मंदिर की स्थिति इस वक्त काफी बुरी है। मंदिर के देख-रेख करने वाले विभाग ने कहा है कि जिन लोगों को इस मामले में कोई आपत्ति है वो 29 अक्टूबर तक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लोग इसे केवल एक औपचारिकता बता रहे हैं क्योंकि कलेक्ट्रेट दफ्तर के निर्माण का काम सीएम द्वारा 23 अक्टूबर को शिलान्यास के बाद जोरों-शोरों से चल रहा है।

भगवान अर्धनारीश्वर के इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि ये मंदिर 1500 साल पहले चोल वंश द्वारा बनाया गया था, जो 1990 के दशक के बाद यहां के बंदोबस्ती विभाग के आधीन हो गया है। यह भयावह है कि सरकार द्वारा लगातार हिन्दू धर्मस्थलों की जमीनों को निशाना बनाया जा रहा है और गैरकानूनी तरीके से उन पर कब्जा किया जा रहा है। हिन्दुओं को बार-बार सरकार द्वारा इसका शिकार बनाया जा रहा है जबकि  अन्य किसी भी धर्म में सरकार को हस्तक्षेप करने की कोई आजादी नहीं है।

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