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27 September 2020

जरूरी है UN में ये बदलाव..PM मोदी ने संयुक्त राष्ट्र को लेकर कही ये बात, पूछे ये तीखे सवाल

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यूएन के जनरल असेबंली को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होेंने कई मुद्दों का जिक्र किया। एक तरफ जहां उन्होंने 1945 के संयुक्त राष्ट्र और अब के संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि 1945 में जिन परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ था। क्या वो आज की तिथि में उतने ही प्रासंगिक हैं। अगर हम चाहते हैं कि यह प्रसांगिकता बरकरार रहे तो फिर हमें इस संगठन में कुछ बदलाव करने होंगे। अब समय आ चुका है और यह बदलाव जरूरी भी है। उधर,  पीएम मोदी ने अपने संबोधन में मौजूदा दौर में चल रहे कई ऐसे मसलों का भी जिक्र किया ,जो सीधा समस्त मानवजाति को प्रभावित कर कर रहे हैं। उन्होने कोरोना वायरस महामारी का जिक्र कर इससे लड़ने के लिए एकजुट होने की अपील की है। बता दें कि कोरोना के संकट के दौरान यह आयोजन वर्चुअल तरीके से किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने अपने भाषण में यूएन में स्थायी सीट का मुद्दा भी उठाया।

पीएम मोदी के भाषण की अहम बातें

-पीएम मोदी ने अपने भाषण में कोरोना महामारी का जिक्र किया। पीएम ने कहा कि भारत हमेशा से समस्त मानव समुदाय के हित के बारे में सोचता रहा है। भारत अपनी नीतियां भी इसी तथ्य को मद्देनजर रखते हुए तैयार करता है। और भारत ने अपने इस सिंद्धात को कोरोना महामारी के दौरान सिद्ध भी किया है। भारत की फॉर्मा कंपनियां 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाएं मुहैया करा रही है, ताकि इस महामारी से लड़ा जा सके।

-पीएम मोदी ने कहा कि भारत जब किसी दूसरे देश के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाता है तो यह किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होता है। भारत किसी देश को मजबूर करने के सिंद्धात पर कतई विश्वास नहीं रखता है। पीएम ने कहा कि हम अपने अनुभव को साझा करने में कभी पीछे नहीं रहते हैं। इस दौरान उन्होंने यूएन में चल रहे बदलाव की प्रक्रिया पर कहा कि भारत के लोग इसे लेकर चिंतित हैं।

-इतना ही नहीं, पीएम मोदी ने कहा कि अब समय की जरूरत है कि यूएन में प्रतिक्रियाओं में बदलाव, व्यवस्थाओं में बदलाव, स्वरूप में बदलाव किया जाए। इस बीच पीएम मोदी ने यूएन पर सवालिया निशान भी खड़े किए। उन्होंने कहा कि कोरोना के इस दौर में यूएन कहां पर है? यूएन की प्रभावशाली प्रतिक्रिया कहां पर है?

-पीएम मोदी ने कहा कि यह बिल्कुल ठीक है कि तीसरा विश्व युद्ध नहीं है, लेकिन इस बात को भी नहीं नकारा जा सकता है कि अनेकों युद्ध हुए, अनेकों गृहयुद्ध भी हुए। कितने ही आतंकी हमलों ने खून की नदियां बहती रहीं। इन युद्धों और हमलों में, जो मारे गए वो हमारी-आपकी तरह इंसान ही थे। ऐसे लाखों मासूम बच्चे जिन्हें दुनिचया पर छाना जाना था। दुनिया छोड़कर चले गए। उस समय और आज भी, संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे? 

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