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17 September 2020

भारत को सशक्त राष्ट्र बनाने के साथ नासूर बनी समस्याओं का निकाला हल, जानें पीएम मोदी की उपलब्धियां

 

लखनऊ। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज 70वां जन्मदिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 में हुआ था। देश को कई वर्षों बाद नरेंद्र मोदी जैसा सशक्त राष्ट्रभक्त प्रधानमंत्री मिला है। जिनके नेतृत्व में भारत को पूरे विश्व में एक अलग पटल मिला है। हर पक्ष का विपक्ष होता है। पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे के पूरक होते हैं। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर काफी सटीक बैठता है। क्योंकि पीएम मोदी का पक्ष जितना मजबूत है विपक्ष भी उतना सशक्त है। शायद यही कारण है कि उनके पक्ष में भी उनका विपक्ष दिख जाता है। जन्मदिन पर देश के हर तबके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुभकामना संदेश दिए जा रहे हैं। मजे की बात यह है कि विरोधी शुभकामना संदेश में भी कटाक्ष करने से नहीं चूक रहे हैं। कोई बेरोजगारी देने वाला प्रधानमंत्री बता रहा है तो कोई बेरोजगार करने वाला। कुछ यह भी कामना कर रहे हैं कि ईश्वर आपको बेहतर शासन करने वाला बनाए। कई ऐसे हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को बेरोजगारी दिवस के रूप में मना रहे हैं।

केंद्र की सत्ता में प्रधानमंत्री के पदार्पण के बाद राजनीति से लेकर हर क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया है। उपलब्धि और नाकामी दोनों हर व्यक्ति के साथ होते हैं। एक सच यह भी है कि आपकी एक नाकामी आपको खास से आम बना देती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर अगर देश का युवा बेरोजगारी दिवस के रूप में मना रहा है तो यह उनकी नाकामी का नतीजा है जिसे विपक्ष भी भूनाने की पूरी जुगत में लगा हुआ है। जबकि सोचना होगा कि कोई भी सरकार हो सभी मोर्चे पर सफल हो यह संभव नहीं है। विरोधी व विपक्ष का स्वभाव वह आपकी हर नाकामी को उजागर करे। लेकिन इसका यह भी मतलब नहीं होना चाहिए कि आपकी उपलब्धियों को नजरंदाज किया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक सशक्त राष्ट्र बन कर उभरा है, इस बात को मोदी का विरोध करने वाले भी जानते हैं।

भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान—चीन के रवैए से देश किस तरह जूझ रहा है यह किसी से छिपा नहीं है। बावजूद इसके इन देशों का भारत किस तरह से डट कर मुकाबला कर रहा है यह भी सबके सामने है। किसी मुद्दे पर साथ देना और साथ देने का दिखावा करने में बड़ा फर्क होता है। भारत की विपक्षी पार्टियां भारतीय सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे पर सरकार के साथ होने की बात तो करते हैं, लेकिन उनके बयान पता नहीं क्यों प्रधानमंत्री व देश की सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ होते हैं। इसी तरह पीएम मोदी का विरोधियों को भी सोचना होगा कि जिस स्वच्छ सत्ता की बात की जाती थी वर्तमान समय में ऐसी सत्ता हमारे सामने है। सबका साथ, सबका विकास का ध्येय रखकर आगे बढ़ने वाली केंद्र की मोदी सरकार ने जाति आधारित राजनीति पर विराम लगाया है। यह बात कुछ लोगों को भले ही समझ में न आ रही हो पर सच यह है कि जातीय समीकरण के आधार चुनाव जीतने वाले नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है।

हाल के दिनों में पीएम मोदी के बढ़ते वर्चस्व के विरोध में विपक्षी इतने बौखला गए कि मोदी के पक्ष में बोलने वालों को ‘भक्त’ की संज्ञा दे दी जा रही है। वहीं मोदी समर्थक ऐसे लोगों का देश विरोधी बताने लगे हैं। जबकि दोनों पक्षों के लोगों को सोचना चाहिए कि सभी देश के नागरिक है और प्रधानमंत्री भी इसी देश के हैं। इसलिए पीएम की आलोचना केवल जुबानी करने की जगह आंकड़ों के साथ करना चाहिए। सच है कि कोरोना संकट के बीच जीडीपी गर्त में चली गई है, बेरोजगारी चरम पर है। जबकि उपलब्धियों में देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतिहास पुरुष बन कर उभरे हैं। अपने फैसलों से उन्होंने जो इतिहास रचा है उसका ऋणी हर भारतवासी है। कुछ लोगों को यह बात अटपटी लग सकती है लेकिन तीन तलाक बिल, जम्मू—कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35 ए का खात्मा, नागरिकता कानून जैसे फैसले लेने की हिम्मत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छोड़कर देश के किसी नेता नहीं थी।

तीन तलाक व अनुच्छेद 370 देश के माथे पर लगा वह धब्बा था जिससे निजात पाने की अकुलाहट देश के हर जिम्मेदार नागरिक में थी। तीन तलाक, हलाला जैसे कुकृत्य से मुस्लिम महिलाओं को आजादी दिलाना इतना आसान होता तो सती प्रथा की तरह यह भी कुप्रथा कब की समाप्त हो चुकी होती। आतंक का दंश झेल रहे जम्मू—कश्मीर में शांति बहाली की बात आजादी के बाद से होती आ रही थी। लेकिन क्या बिना अनुच्छेद 370 को समाप्त किए यह संभव था। अनुच्छेद 370 की वजह से जम्मू—कश्मीर भारत का होकर भी नहीं था। यहां भारतीय संविधान लागू नहीं होता था। राज्य का अपना अलग झंडा था। ऐसे में शांति बहाली की बात करना बेमानी था। हमारे राजनेता इसी छल के साथ जनता को आज तक छलते चले आ रहे थे। ऐसे में जिन लोगों को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ नहीं किया, उन्हें यह सोचना होगा कि पीएम ने देश के लिए नासूर बन चुकी समस्याओं का न सिर्फ नेस्तानाबूद किया बल्कि इन मुद्दों पर राजनीति करने वालों की दुकानों पर ताला लगा दिया।

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