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10 September 2020

‘अछूतों’ के लिए कर्ण ने उठाई थी आवाज़, कृष्ण से भी करवा लिये थे ये काम

भारत में जातिगत भेदभाव और छुआछूत आज का नहीं है। ये उत्तर वैदिक काल से चला आ रहा है। चाहे त्रेता रहा हो या फिर द्वापर-युग, हर पीरिएड में बड़े-बड़े आइडियल इसके शिकार रहे हैं। एक ऐसा ही उदाहरण महाभारत पीरिएड में कर्ण के रूप में हमें देखने को मिलता है।कर्ण महाभारत में एक ऐसा कैरेक्टर था, जो देवपुत्र होने के बावजूद भी सामाजिक भेदभाव और प्रताड़ना का शिकार रहा। उसको तब की सोसायटी में कॉमन तरीक़े के एक्सेप्ट नहीं किया गया। कर्ण को ये प्रॉब्लम सिर्फ़ इसलिए फेज़ करनी पड़ी थी, क्योंकि वह अनमैरिड कुन्ती और सूर्य देवता का पुत्र था।
सूतपुत्र कहकर नकारे गये कर्ण
कर्ण का पालन-पोषण एक रथ-सारथी ने अपने घर में किया था, जिसके कारण उन्हें सूतपुत्र कहा जाता था। सूतपुत्र का मतलब उस दौरान अछूत और नीची जाति से था।इसके कारण कर्ण को समाज में अनेक बार सीधे तौर पर अपमान का सामना करना पड़ा। कर्ण के सुतपुत्र होने के कारण ही द्रोपदी, जिसको कर्ण अपनी जीवन-संगिनी बनाना चाहता था, उसने कर्ण से विवाह से इंकार कर दिया था।
अछूतों के लिए कर्ण की मंगलकामना
कर्ण की मौत का कारण कृष्ण बने थे, क्योंकि उन्होंने ही अर्जुन को कर्ण के वध का तरीक़ा बताया था। कर्ण के अंतिम समय में भी इस दानवीर योद्धा से कृष्ण ने परीक्षा ली और उससे दान माँगा। तब कर्ण ने दान में अपने सोने के दाँत तोड़कर भगवान कृष्ण को सरप्राइज़ कर दिया था। इस दानवीरता से ख़ुश होकर कृष्ण ने कर्ण को वरदान मांगने के लिए कहा।कर्ण ने वरदान के रूप में अपने साथ हुए हरशमेंट को याद करते हुए कृष्ण से ये वरदान माँगे...-अपना अंतिम संस्कार पाप-मुक्त व्यक्ति से कराने को कहा। अन्त में दुविधावश कृष्ण को ही ये काम करना पड़ा जोकि आज भी नीच कर्म माना जाता है।-अगले जन्म में कृष्ण को अपने राज्य में जन्म लेने को कहा, ताकि कर्ण राजा और कृष्ण प्रजा के इमोशन फील कर सकें।-इसके अलावा कृष्ण से अगले जन्म में कर्ण ने अपने अछूत वर्ग के लोगों का कल्याण करने को कहा। हालांकि यह बात अलग है कि पूरा द्वापर बीत जाने के बाद कलयुग आ गया और आज 21वीं सदी में भी छुआछूत हमारी सोसायटी में जस की तस है।

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