हिंदी अब हिंग्लिश हो गई है.. किसी के बाप का क्या जाता है ? - Bollyycorn

Breaking

Bollyycorn

Bollywood-Hollywood-TV Serial-Bhojpuri-Cinema-Politics News, Gadgets News

10 September 2020

हिंदी अब हिंग्लिश हो गई है.. किसी के बाप का क्या जाता है ?


जिस देश का हर नागरिक उसकी भाषा की हत्या करने पर तुला हो। जिस देश की भाषा को जबर्दस्ती आधुनिकता का हवाला देकर मिलावटी किया जा रहा हो। गुलामी के जमाने से चली आ रही मानसिकता जब भाषा पर इस हद तक हावी हो गई हो कि उसे पटक-पटककर बदलने पर मजबूर कर दिया गया हो। उस देश की भाषा को मरने से शायद ही कोई बचा सकता हो।


बदले अस्तित्व में हिंदी का केवल हि है और इंग्लिश पूरी तरह हावी होकर नाम पर भी कब्जा जमा चुकी है। जी हां जब आप लोग कहते हैं कि हम हिंग्लिश जानते हैं, इतनी भारी भरकम हिंदी भला कौन इस्तेमाल करता है आजकल। तो शर्म आ जाती है। इसीलिए नहीं कि मुझे मिलाकर (कुछ विशेषज्ञों को छोड़कर) शायद 10 प्रतिशत लोगों को ही हिंदी का ज्ञान है। बल्कि वजह यह है कि आजकल की पौध आधुनिक होने का ताज पहनकर अपनी भाषा को मारने में जुटी है। कई अक्षर हिंदी के अखबारों से ही गायब हो चुके हैं। कुछ साल बाद शायद ही किसी को उनके बार में पता हो। जैसे यह की जगह ये और वह की जगह वो इत्यादि।

जरा नजर घुमाकर देखिए कि आपके आस-पास के देशों ने अपनी भाषाओं को कितना सहेजकर रखा हुआ है। अमेरिका, लंदन, कोरिया, जापान, दुश्मन देश चीन, पाकिस्तान या फिर किसी भी और देश में भाषा के स्तर से अपना मूल्यांकन करिए।

हालात यह हैं कि हमारे देश में हिंदी मीडियम नाम से फिल्म बनाई जाती है। सिनेमा असल जिंदगी का आईना है। जी हां यह सच है कि हमारे देश में इंग्लिश मीडियम स्कूलों के बाहर कतारें लगती हैं, मां-बाप के इंटर्व्यू होते हैं और यह भी कोई राज़ नहीं है कि मोटी डोनेशन वसूली जाती है। तब जाकर इन कथित बड़े स्कूलों में दाखिला मिल पाता है।

जरा सोचिए, देश में बच्चों को अंग्रेजी सिखाने की होड़ इतनी है कि ABCD ककहरे से पहले सिखाया जाता है। सुकून इस बात का है कि अभी तक हम अपने बच्चों को पैदा होते ही MOM कहने के लिए मजबूर नही कर पा रहे। शायद इसकी वजह ही, हमारी भाषा की वैज्ञानिकता का प्रमाण है। बच्चा सबसे आसानी से आ ई ऊ ओ ए के बाद मां ही बोल पाता है। हिंदी बेचारी हमारे ही देश में मातृ भाषा से मात्र भाषा ही रह गई है। और विडंबना यह है कि मातृ को मात्र कहने वाले मासूम यह भी नहीं जानते कि वो हत्या कर रहे हैं। हालांकि उनके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चला सकता।

चुपचाप मर गई संस्कृत
रहा बस नाम-ओ-निशान
हिंग्लिश हो चुकी हिंदी

निसदिन होता अपमान 

आपको ये पोस्ट कैसी लगी नीचे कमेंट करके अवश्य बताइए। इस पोस्ट को शेयर करें और ऐसी ही जानकारी पड़ते रहने के लिए आप बॉलीकॉर्न.कॉम (bollyycorn.com) के सोशल मीडिया फेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम पेज को फॉलो करें।

No comments:

Post a Comment