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27 September 2020

पीएम ने फिर समझाया, किसानों की नए कृषि कानूनों से कैसे सुधरेगी जिंदगी

 

नई दिल्‍ली। ‘मन की बात’ के 69वां एपिसोड के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर जनता से अपने विचारों को साझा किया। उन्होंने कोरोना संकट के दौरान जीवन में आए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि अब लोगों को परिवार का मतलब समझ में आ गया होगा। इस दौरान उन्‍होंने लॉकडाउन में गुजारे गए पलों को भी याद किया। पीएम मोदी ने कहानी सुनाने की कला को फोकस करते हुए कहा कि कहानियों का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी कि मानव सभ्‍यता। हितोपदेश और पंचतंत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कहानियों के माध्यम से विवेक और बुद्धिमत्‍ता का संदेश दिया जाता है। प्रधानमंत्री ने ‘बेंगलुरु स्‍टोरी टेलिंग’ ग्रुप से एक कहानी सुनाने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि कहानियां, लोगों के रचनात्मक और संवेदनशील पक्ष को उभारती हैं, उसे प्रकट करती हैं। कहानी की ताकत का एहसास करना हो तो जब कोई मां अपने बच्चे को सुलाने, मनाने या फिर उसे खाना खिलाने के लिए कहानी सुना रही होती है तब समझा जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं अपने जीवन में बहुत लम्बे समय तक एक परिव्राजक के रूप में रहा। घुमंत की तरह ही मेरी जिंदगी थी। रोजाना नया गांव, नए लोग, नए परिवारों से मुलाकात।

साथियों, भारत में कहानी सुनाने, किस्सागोई की एक समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने लोककल्याण की बात करते हुए कहा कि हमें गर्व है कि हम उस देश के वासी है, जहां हितोपदेश और पंचतंत्र की परंपरा हमेशा से रही है। जहां कहानियों के माध्यम से पशु-पक्षियों और परियों की काल्पनिक दुनिया बनाई गई, जिससे विवेक और बुद्धिमता की बातों को सही तरीके से समझाया जा सके।

हाल ही में कृषि से जुड़े तीन विधेयक पास हुए हैं, जिसका देश के कुछ हिस्सों में भारी विरोध हो रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान के अनुभवों को साझा करते हुए नए प्रावधानों के बारे में समझाया। उन्‍होंने कहा, कई किसान हैं जिनकी चिट्ठियां मुझे मिलती रहती हैं, किसान संगठनों से भी मेरी बात होती है, ये लोग किसानी से जुड़ी बातें बताते हैं। जानकारी देते हैं कि कैसे खेती में नए-नए आयाम जुड़ रहे हैं, खेती में बदलाव कैसे आ रहे हैं। हरियाणा के सोनीपत जिले के किसान कंवर चौहान की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने बताया है कि एक समय था जब उन्हें मंडी से बाहर अपने उत्पादों को बेचने में काफी दिक्कत आती थी। अगर वह मंडी से बाहर फल व सब्जियां बेचते थे, तो ऐसे में कई बार उनकी फल, सब्जी व गाड़ियां तक जब्त हो जाती थी। कृषि के नए कानून से किसानों का इस तरह की कई समस्याओं से निजात मिलेगी। किसान अपने उत्पाद को कहीं भी बेचने को स्वतंत्र हो गए हैं।

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