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02 September 2020

चीन में ‘परमाणु हथियारों’ की जबरदस्त वृद्धि, ड्रैगन के निशाने पर भारत समेत ये देश

 

चीन इस समय अपनी खुन्नस न महज भारत बल्कि कई अन्य देशों से निकालने की फिराक में बैठा है। उसने भारत के खिलाफ तो मोर्चा खोल ही रखा है। इसमें कोई दोमत नहीं लेकिन अब वह भारत समेत उन सभी देशों को सबक सिखाना चाहता है कि जिसने भारत का साथ दिया है और इसके लिए उसने पूरी तैयारी भी करना शुरू कर दी है। चीन अब इसके लिए परमाणु हथियारों का जखीरा जुटाने की तैयारी में जुट चुका है। ड्रैगन परमाणु हथियारों का जखीरा जमा करने की फिराक में लग गया है, जिसका इस्तेमाल वो भारत समेत उन सभी देशों पर हमला करने के लिए कर सकता है, जो भारत का साथ दे रहे हैं।

चीन की इस करतूत का खुलासा पेंटागन की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों को भी शामिल करेगा। माना जा रहा है कि यह मिसाइलें अमेरिका को तबाह करने का माद्दा रखती हैं। ऐसी स्थिति में आप ड्रैगन की हो रही खतरनाक तैयारी का अंदाजा सहज ही लगा सकते हैं। China Military Power नाम की इस रिपोर्ट में पेंटागन ने एशिया के देशों को भी चीन के इस नए प्रोजेक्ट के प्रति अलर्ट रहने को कहा है।  रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन परमाणु बलों का आधुनिकरण और विस्तार पेइचिंग के विश्व स्तर पर विकसित करने का साधन है। चीन एशिया प्रशांत में प्रमुख शक्ति बनने के लिए  2049 तक अमेरिका के बराबर बनने के लिए परमाणु शक्ति के तहत कार्य कर रहा है।

इतना ही नहीं, पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यूक्लियर फोर्स अगले दशक  तक महत्वपूर्ण रूप से विकसित हो जाएगी। इस दौरान चीन, जमीन  और हवा के जरिए हमला करने के लिए अपने साधनों को विकसित करने के उपाय तलाश रहा है। अब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि परमाणु युद्धक कम से कम दोगुने हो जाएंगे। उधर, इस बात का दावा किया गया है कि चीन के परमाणु हथियार होने के बाद भी अमेरिका के परमाणु बम भंडार की तुलना में बहुत कम होंगे। इस संदर्भ में अधिक जानकारी देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि चीन का शस्त्रागार बातचीत की सीमा में शामिल होने के लिए बहुत छोटा है। उधर, चीन से परमाणु हथियार को लेकर हुई बातचीत के लिए बेताब अमेरिका खुद रूस के साथ न्यू स्टार्ट  के साथ हथियार संधि से बाहर आ गया है।

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