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15 September 2020

भारत-चीन: एलएसी पर हालात जस के तस,विदेश मंत्री स्तर की वार्ता के बाद भी चीन खामोश

 

ladakh

नई दिल्ली। पिछले दिनों मास्को में हुई चीन और भारत के विदेश मंत्रियों के बातचीत के बाद दोनों देशों में संबंधों में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। सीमा पर हालात जस के तस बने हैं। हालंकि वास्तविक नियन्त्रण रेखा (एलएसी) पर अभी चीन सैनिकों के मूवमेंट देखने को नहीं मिल रहा हैं,लेकिन उनकी तैनाती में भी कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। विदेश मंत्रियों की वार्ता के बाद दोनों सेनाओं के लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बैठक करने पर सहमति बनी थी, जो इसी हप्ते होने की संभावना है। अभी तक यह बैठक मंगलवार को होने की उम्मीद थी लेकिन सोमवार तक इस बैठक को लेकर न तो कोई तारीख़ तय की गयी और न ही मुद्दे। ऐसे में अभी यह नहीं कहा जा सकता कि बैठक कब होनी है।

सूत्र बताते हैं कि सीमा पर शांति बनी रहे और सारे मुद्दों को बातचीत के जरिए हल किया जाए, भारत की यही प्राथमिकता है। चीनी सेनायें पीछे हटेंगी, या नहीं, यह तो जब कमांडर लेवल की बातचीत होगी इसके के बाद ही पता चलेगा। सूत्रों के मुताबिक भारत का साफ़ कहना हैं उसने सीमा पर स्थिति बदलने का प्रयास कभी नहीं किया और मौजूदा दौर में भारतीय सेना ने सीमा पर जो भी पोजीशन ली है वह चीन के आक्रमक रवैये ही वजह है ताकि चीनी सेना के मूवमेंट को रोका जा सके। जब चीन दोनों देशों की बीच बनी सहमति का पालन करेगा तो निश्चित रूप से भारत भी सीमा पर अपनी रणनीति में बदलाव करेगा। सूत्रों के मुताबिक सीमा विवाद मुद्दा जटिल है ऐसे में हल निकालने में तो समय लगेगा, लेकिन दोनों पक्षों का हित इसी में है कि सीमा पर अप्रैल वाली स्थिति बरकरार रखी जाये।

भारत से दिखाया सकारात्मक रुख 

हालंकि अब इस मामले में चीन का रुख क्या होगा यह देखने वाला है। भारत-चीन की बातों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं कर सकता। अब रणनीतिक स्तर पर कुछ बढ़त वाली जगहों पर तैनात होने के बाद से भारत बातचीत को लेकर अनावश्यक आतुरता भी नहीं दिखा रहा। जबकि चीनी पक्ष ने मास्को रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री स्तर की वार्ता को लेकर बेचैनी दिखाई थी। भारत ने वहां भी सकारात्मक रूप से जवाब देते हुए अपना पक्ष मजबूती से रख दिया है । अब चीन इस पर चीन क्या फैसला लेता है, यह आने वाला समय बतायेगा।

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