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24 September 2020

भारत के इन शहरों में होता है भूकंप का सबसे ज्यादा खतरा, कहीं आप तो इस शहर में नहीं रहते?


भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, जिसे कोई रोक नहीं सकता। भूकंप आने पर पृथ्वी की सतह अपने आप हिलने लगती है, भूकंप की तीव्रता पर निर्भर करता है कि भूकंप कितना खतरनाक है। ज्यादा तीव्रता से आने वाला भूकंप अपने साथ ज्यादा तबाही लेकर आता है, वहीं कम तीव्रता से आने वाला भूकंप कम नुकसानदायक होता है। इसके अलावा भूकंप का खतरा देश के अलग-अलग जगहों पर भी निर्भर करता है।

खतरे के हिसाब से देश को 4 हिस्सों में बांटा गया है। जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5।

जोन-5 में आने वाले क्षेत्र सबसे ज्यादा खतरे वाली जगह होते हैं। इसमें पूर्वेत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात में कच्छ, उत्तर बिहार, अंडमान निकोबार द्वीप जैसे समूह शामिल हैं। यहां ट्रैप या बेसाल्ट की चट्टाने होती है इसे भूकंप की दृष्टि से सबसे खतरनाक क्षेत्र माना जाता है, जिसकी तीव्रता एमएम 9 होती है।

जोन-4 को सबसे ज्यादा तबाही वाला क्षेत्र भी कहा जाता है, यहां भूकंप की तीव्रता एमएम 8 होती है। इस जोन में दिल्ली, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, सिंध गंगा थाला, उत्तर बिहार को छोड़कर सारा बिहार और पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पश्चिमी तट के समीप महाराष्ट्रा का कुछ भाग, दिल्ली का शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मीनगर, गुड़गांव, रेवाडी, नोएजा इसमें शामिल है।
जोन-3 में समान्य तबाही वाले क्षेत्र को रखा गया है, जिसकी तीव्रता एमएम 7 होती है। इसमें उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्से ओडिसा, आंद्र प्रदेश, तमिलनाडू और कर्नाटक शामिल हैं।

जोन-2 सबसे कम खतरे वाला जोन माना जाता है। यहां भूकंप का खतरा बेहद ही कम होता है। इन जगहों पर भूकंप से तबाही का खतरा बेहद कम होता है। बाकी बचा सारा भारत इसी भूकंप जोन की श्रेणी में आता है।

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