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05 September 2020

भारत पर हमला कर ASEAN को कड़ा संदेश पहुंचाना चाहता था चीन पर तिब्बतियों ने उसी की हवा निकाल दी

 


लद्दाख में चीन की आक्रामकता का क्या कारण है? इस बात में किसी को कोई शक नहीं है कि चीन भारत को एक कडा संदेश देना चाहता है, और साथ ही वह अपनी जनता का ध्यान भी कोरोना और भुखमरी से भटकाना चाहता है। हालांकि, चीन के रणनीतिकारों के बयानों का विश्लेषण किया जाये, तो एक बात और समझ में आती है कि लद्दाख में चीन भारत पर धौंस दिखाकर सिर्फ नई दिल्ली को ही नहीं, बल्कि मीलों दूर दक्षिण चीन सागर में ASEAN देशों को भी एक जोरदार संदेश भेजना चाहता है। चीनी रणनीतिकार यह बात मानते हैं कि अगर लद्दाख में भारत को काबू में नहीं रखा गया तो ASEAN देश भारत से हौसला लेकर दक्षिण चीन सागर में चीन के खिलाफ और ज़्यादा आक्रामक हो सकते हैं।

15 जून को भारत-चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद जिस प्रकार ASEAN देशों ने खुलकर चीन का विरोध करना शुरू किया है, उसने चीन को चिंता में डाल दिया है। India Today की रिपोर्ट के अनुसार चीनी रणनीतिक विशेषज्ञ इस बात को समझते हैं कि अगर लद्दाख में चीन ने भारत को काबू में नहीं किया तो इसके बाद अमेरिका, ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस और अन्य देश भी चीन के खिलाफ और ज़्यादा मुखर हो जाएंगे। इसलिए कैसे भी करके चीन लद्दाख की चोटियों पर भारत को पीछे धकेलना चाहता है, ताकि दूर ASEAN की राजधानियों में खौफ का माहौल बनाया जा सके। इसीलिए 29-30 अगस्त की रात को पैंगोंग झील के दक्षिणी इलाके में चीन ने आक्रामकता दिखाने का प्रयास किया था। हालांकि, चीन को शायद पता नहीं था कि भारत के Special Frontier Forces यानि SFF चीन के सारे मंसूबों पर पानी फेरने के लिए तैयार बैठे हैं।

यह बात सच है कि दक्षिण चीन सागर में हमें “Ladakh Effect” देखने को मिला है। लद्दाख में चीन की हार का सीधा संबंध दक्षिण चीन सागर में भी देखने को मिला है। 15 जून को जब लद्दाख में भारत ने चीन को धूल चटाई तो ASEAN देश ज़्यादा आक्रामकता के साथ चीन से मुक़ाबला करने लगे हैं। उदाहरण के लिए सबसे पहले फिलीपींस की नेवी ने भारत को दक्षिण चीन सागर में आने का न्यौता दे दिया। फिलीपींस नेवी चीफ ने एक बयान जारी कर कहा कि दक्षिण चीन सागर में भारत के आने से यहाँ का माहौल ज़्यादा सुरक्षित हो सकेगा। इतना ही नहीं, वियतनाम ने तो भारत को उसके Exclusive Economic Zone में आकर तेल और गैस निकालने का आह्वान किया है, ताकि वहाँ चीन के लिए चुनौती खड़ी की जा सके। चीन को सबसे बड़ा झटका हाल ही में फिलीपींस ने तब दिया था जब उसने कहा कि अगर चीन के साथ उनका कोई विवाद होता है तो सीधा अमेरिका को बीच में बुला लेंगे। चीन को ASEAN से इस तरह के रुख की कभी आशा नहीं रहती है। चीन को लगता है कि ASEAN देशों को लद्दाख में चीन की हार से हौसला मिला है, जो दक्षिण चीन सागर में चीन का सरदर्द बढ़ा रहा है। इसलिए उसने 29-30 अगस्त को पैंगोंग में भारत को बैकफुट पर धकेलने के लिए ही कालाटॉप और रेकीन की पहाड़ियों पर कब्जा करने की कोशिश की थी। हालांकि, वहाँ भारतीय सैनिकों ने चीन को बड़ा सरप्राइज़ दिया।

29-30 अगस्त की रात को भारतीय SFF ने ना सिर्फ चीन की चाल को पूरी तरह नाकाम किया बल्कि एक बड़ा pre-emptive action लेते हुए Black Top, Helmet Top और रेकीन की पहाड़ियों को अपने कब्जे में ले लिया। ये ऊंची चोटियाँ वर्ष 1962 के बाद से ही भारत के कब्जे से बाहर थी। हालांकि, भारत ने उसे ऐसा झटका दिया कि करीब 30 ऊंची चोटियाँ अब भारत के कब्जे में हैं।

इससे चीन के रणनीतिकारों का डर और गहराने वाला है। 15 जून के बाद भारत को देखकर पहले ही ASEAN देश चीन का खुलकर विरोध करने लगे थे, अब 29-30 अगस्त को हुई चीन की हार के बाद तो चीन के सभी विरोधी देश चीन को और ज़्यादा मजबूती से आड़े हाथों लेंगे। चीन ने सोचा था कि लद्दाख में कैसे भी करके भारत को दबाकर वह ASEAN देशों को भी चुप करा देगा। लेकिन यहाँ भारत ने पूरी बाज़ी को ही पलट दिया, और चीन के पूरे प्लान को मिट्टी में मिला दिया। Ground Zero के साथ-साथ भारत ने Psychological War में भी चीन को धूल चटा दी है।

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