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04 August 2020

शेषनाग और कछुआ सहित इन पंचरत्नों पर रखी जाएगी राम मंदिर की नींव



सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 5 अगस्त यानि बुधवार को राम मंदिर का भूमि पूजन है। जिसकी पहली ईट देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा रखी जाएगी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होने वाले राम मंदिर शिलान्यास के लिए भूमि पूजन काशी विद्वत परिषद से जुड़े विद्वानों की उपस्थिति में वैदिक ब्राह्मण मंत्रोच्चार के साथ कराएंगे। मिली जानकारी के मुताबिक, काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा को अर्पित रजत शेषनाग, कछुआ, रामनाम अंकित चांदी के पांच बेलपत्र, चंदन और पंचरत्न लेकर विद्वानों का दल सोमवार को अयोध्या के लिए रवाना हो चुका है। साथ ही साथ रामलला को चांदी का तांबूल भी अर्पित किया जाएगा। इस बीच मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो चुके हैं। काशी विद्वत परिषद के मंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक, कछुए की पीठ पर विराजमान शेषनाग पाताललोक के स्वामी और भगवान शिव के प्रतिनिधि हैं। इसीलिए राम मंदिर की नींव में बाबा विश्वनाथ को अर्पित भगवान शेषनाग रखे जाएंगे।

शास्त्रों के मुताबिक, धरती शेषनाग पर टिकी है, जिनकी शैय्या पर स्वयं भगवान विष्णु विराजमान है। जबकि कछुआ मां लक्ष्मी की सवारी है। इतना ही नहीं जब समुद्र मंथन हुआ था उस वक्त भगवान विष्णु ने कछुए का अवतार लिया था और पर्वत को अपनी पीठ पर उठाया था। इसीलिए राम मंदिर नींव के नीचे भगवान शेषनाग को रखे जाने की बातें हो रही हैं। वर्षों तक कोर्ट कचहरी में चले केस के बाद राम मंदिर का निर्माण कार्य सुगम हो सका है। इसी बीच लिबरहान आयोग के चेयरमैन ने कहा कि उनको इस बात का आभास था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनमोहन लिबरहान ने कहा कि मुझे साल 1992 में विवादित ढांचा गिराए जाने की जांच सौंपी गई थी लेकिन मुझे 1981 में ही इस बात का आभास हो चुका था कि राम मंदिर का निर्माण होकर रहेगा। 16 दिसंबर 1992 को जस्टिस लिबरहान के नेतृत्व में जांच आयोग को गठित किया गया था और फिर उन्होंने 30 जून 2009 को इससे जुड़ी हुई एक रिपोर्ट भी सौंप दी थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि एक योजना के तहत ढांचा को गिराया गया था।

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