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26 August 2020

कोरोना वैक्सीन को लेकर रूस ने हासिल की कामयाबी! स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा भारत भी संपर्क में

देशभर में कोरोना महामारी का दौर अपने चरम पर है, आए दिन हजारों की संख्या में कोरोना के नए केसेज सामने आ रहे हैं। वहीं मौत का ग्राफ भी प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। बता दें कि देश में कोरोना महामारी से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 30 लाख के पार हो गया है, जबकि 59,449 लोगों की इलाज के दौरान मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में हर किसी को कोरोना की वैक्सीन का इंतजार है। चूंकि कोरोना की वैक्सीन ही इस वायरस का अंतिम समाधान है। बताया जा रहा है कि कई देशों में किए गए कोरोना वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के परिणाम बेहद अच्छे रहे हैं। हाल ही में रूस ने कोरोना की वैक्सीन बनाने का दावा किया था। लेकिन दो सप्ताह बीत जाने के बाद रूस में दी गई कोरोना वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट अभी तक देखने को नहीं मिला है, जिससे ऐसा ऐसा कहा जा रहा है कि रूस की वैक्सीन वाकई कमाल की है। कोरोना से लड़ने में यह वैक्सीन काफी असरदार साबित हुई है। इस बीच खबर आ रही है कि वैक्सीन को लेकर भारत रूस के संपर्क में है।

एएनआई के मुताबिक, स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि जहां तक रूस द्वारा विकसित  Sputnik-5 वैक्सीन का संबंध है तो भारत और रूस संपर्क में हैं. प्रारंभिक स्तर पर जानकारियां साझा की गई हैं।

वहीं (ICMR) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि भारत में तीन वैक्सीन क्लीनिकल स्टेज पर है और तीन प्री क्लीनिकल स्टेज पर। भारत बॉयोटेक फेज-1 में है, इसके साथ ही जायड्स कैडिला की वैक्सीन का ट्रायल फेज-2 में है, जबकि सीरम इंस्टीट्यूट का ट्रायल फेस-3 में है।

बलराम भार्गव ने बताया कि दो डोज की ये सब वैक्सीन है. 14-28 दिन पर दूसरा डोज दिया जाता है और फिर 2-4 हफ्तों के बाद एंटीबॉडीज देखी जाती हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ गैर जिम्मेदार लोगों की वजह से महामारी बढ़ रही है। कोरोना वायरस से पीछा छुटाने के लिए सरकार की गाइडलाइंस को पूरी तरह से फोलो करने की आवश्यकता है। हालांकि वैज्ञानिकों की रिसर्च तो लगातार जारी

है, उम्मीद है कि यह सारे ट्रायल पूर्ण होने के बाद वैक्सीन मार्केट में उतारी जाए। इसके लिए साल-छह महीने का समय भी लग सकता है।

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