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22 August 2020

गणेश जी के विवाह की कहानी बड़ी ही रोचक है, आप भी जानें कैसे सम्पन्न हुई शादी

गणेश को देवताओं में प्रथमपूज्य माना जाता है और जब भी कोई शुभ कार्य शुरू किया जाता है तब गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है। ऐसा माना जाता है कि भाद्रपद की चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन गणेश चतुर्थी त्योहार खूब धूम धाम से मनाया जाता है। ज्ञात हो गणेश जी भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं, मगर क्या आपको ये मालूम है कि उनका विवाह किससे और कैसे हुआ था। असल में, भगवान गणेश का सिर हाथी का और एक दांत टूटा था, इसलिए कहा जाता है कि उनका विवाह नहीं हो पा रहा था। पौराणिक कहानियों के अनुसार, कोई भी कन्या गणेश जी से विवाह करने को तैयार ही नहीं थी। जब गणेश जी का विवाह नहीं हुआ वे उदास रहने लगे। वह जब भी किसी दूसरे देवता के विवाह में जाते तो उन्हें बड़ी तकलीफ होती थी। इसी कारण गणेश जी ने दूसरे देवताओं के विवाह में भी विघ्न डालना शुरू कर दिया और इस काम में उनका वाहन मूषक उनकी मदद करता था।

गणेश जी का वाहन मूषक उनके आदेश पर देवताओं के विवाह मंडप को नष्ट कर देता था, जिससे उनके विवाह में दिक्क्तें पैदा हो जाती थीं। गणेश जी और मूषक की इस मिलीभगत से सारे देवता बहुत परेशान हो गए और अपनी इस परेशानी को लेकर गणेश जी के पिता भगवान शिव के पास पहुंचे, मगर वहां भी उनकी परेशानियों का हल नहीं निकल सका। भगवान शिव और देवी पार्वती ने देवताओं से कहा कि इस समस्या का हल ब्रह्मा जी के पास है।

जिसके बाद सारे देवता अपनी समस्या लेकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। उस वक्त ब्रह्मा जी योग में लीन थे। देवताओं की प्रार्थना पर उनकी समस्या के समाधान के लिए ब्रह्मा जी के योग से दो कन्याएं ऋद्धि और सिद्धि प्रकट हुईं। इस कारण से वो दोनों ब्रह्माजी की मानस पुत्री कहलाईं। अब अपनी दोनों पुत्रियों को लेकर ब्रह्मा जी गणेश जी के पास पहुंचे और उनसे बोले कि आपको मेरी दोनों पुत्रियों को शिक्षा देनी होगी। इसके लिए गणेश जी ने हां कर दी। दोनों की शिक्षा शुरू हो गई। इस दौरान जब भी मूषक किसी देवता के विवाह की सूचना देने गणेश जी के पास आता तो ऋद्धि और सिद्धि उनका ध्यान भटकाने के लिए कोई न कोई बात करने लगती थीं। इससे देवताओं का विवाह बिना किसी समस्या के होने लगी।

एक दिन गणेश जी को सारी बातें मालूम चली ऋद्धि और सिद्धि के कारण देवताओं का विवाह बिना किसी रुकावट के सम्पन्न हो रहा है। इससे गणेश जी बहुत गुस्सा हो गए। हालांकि उसी वक्त ब्रह्मा जी वहां प्रकट हुए और गणेश जी से कहने लगे कि मुझे अपनी दोनों पुत्रियों ऋद्धि और सिद्धि के विवाह के लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा है, गणेश जी आप ही इनसे विवाह कर लें। इस प्रकार भगवान गणेश का विवाह ऋद्धि और सिद्धि के साथ हुआ। बताया जाता है कि उनसे दो पुत्र भी हुए, जिनका नाम शुभ और लाभ है।

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