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26 August 2020

सुप्रीम कोर्ट में वकील को न बोलने पर जज ने सुनाई ये सजा, नहीं किया माफ़


कभी-कभी वकीलों को अधिक बोलने और आवश्यकता से अधिक प्रतिक्रिया देने पर अदालतों में जजों के क्रोध का सामना करना पड़ता है। लेकिन जो मामला हम आपको बताने जा रहे हैं वो इसके एकदम उल्टा है। एक ऐसा मामला सामने आया है जहां सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील को केवल इसलिए फटकार लगा दी, क्योंकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जजों के कहने के बाद भी उसने अधिकतर वक्त चुप्पी साधे रखी। जिसके बाद उसने कई बार माफी मांगी लेकिन कोर्ट ने इसे गलत चालबाजी करार देते हुए, वकील की एक भी बात नहीं सुनी। सुप्रीम कोर्ट की वर्चुअल कोर्ट-4 में जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान स्क्रीन पर देखते हुए वकील से कुछ बोलने के लिए कहा। लें किसी कारण वकील ने जजों के कहने के बाद भी कुछ नहीं कहा। लेकिन यह साफ नहीं है कि उस दौरान कोई तकनीकी खराबी आ गई थी या कोई और वजह रही। मगर जजों ने एक के बाद एक तीन बार वकील से बोलने के लिए बोला।

इसके बाद भी जब वकील ने कुछ नहीं कहा, तो जज गुस्सा हो गए। जस्टिस नरीमन ने इस मामले को गंभीररता से लेते हुए वकील को चालबाजी करने के लिए फटकार लगाई। इसके बाद वकील ने अचानक से घबराहट में बोलना शुरू किया और जजों के सामने माफी मांगनी शुरू कर दी। वकील ने बताया कि उसका कोर्ट का वक्त जाया करने जैसा कोई इरादा नहीं था। इसके बाद जब कोर्ट ने आदेश पढ़ना शुरू किया, तो वकील ने फिर माफी मांगी और जजों से अपनी गलती को आदेश में शामिल न करने के लिए कहा। जस्टिस नरीमन ने इस पर कोई भी ध्यान न देते हुए निर्णय में कहा, “सुनवाई के दौरान माइक चालू होने और जजों के लगातार तीन बार बोलने के लिए कहने के बाद भी वकील ने अपना मुंह नहीं खोला। उसने ऐसा जानबूझकर नहीं किया, क्योंकि वह सीनियर एडवोकेट का इंतजार कर रहा था।

बेंच ने कहा, “उसे सीधे कोर्ट को बताना चाहिए था कि वह सीनियर वकील का इंतजार कर रहा है। मगर उसने चालबाजी का प्रयास किया। हम इसका विरोध करते हैं। हम नहीं चाहते कि कोई वकील इस प्रकार से सुनवाई के तरीकों का मजाक बनाए। हालांकि, इसके बाद भी हमने वकील की बात सुनी है।” इसके बाद जब वकील ने जजों से माफी मांगते हुए अपील की कि वे अपने आदेश से उसकी चालबाजी से जुड़ी बात हटा दें, तो बेंच ने कहा कि वे ऐसा नहीं कर सकते। जजों ने फटकार लगाते हुए बताया कि यदि वकील चाहता है, तो वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया को लिखकर कार्रवाई के लिए कह सकते हैं। लेकिन, वकील ने इसके बाद फिर से माफी मांगी और चुप्पी साध ली।

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