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01 August 2020

बाबरी विध्वंस पर खुलकर बोले तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह, ये है आखिरी इच्छा

यूपी के पूर्व सीएम और बीजेपी नेता कल्याण सिंह ने गुरुवार को कहा कि उन्हें 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कारसेवकों पर फायरिंग करने की अनुमति देने के सवाल पर लिखित में अनुमति देने से इंकार करने के फैसले पर गर्व है, दरअसल राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल पर मस्जिद का विरोध करने के लिये कारसेवक जमा हुए थे, माना जाता है कि बाबरी मस्जिद वहीं पर है, जहां कभी मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम का जन्म हुआ था, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल पुराने विवाद पर फैसला सुनाया है, और उस विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का आदेश दिया।

विरोध प्रदर्शन बेकाबू
6 दिसंबर 1992 को विरोध प्रदर्शन बेकाबू हो गया था, कथित कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को गिराने की कोशिश की थी, तब यूपी के कल्याण सिंह सीएम थे, इस घटना के बाद ही कल्याण सिंह की सरकार गिर गई थी और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया था, 88 वर्षीय कल्याण सिंह ने कहा कि एक तरह से देखा जाए, तो बाबरी विध्वंस ने ही 5 अगस्त को होने वाले राम मंदिर भूमि पूजन का मार्ग प्रशस्त किया है, उन्होने कहा कि मैं अयोध्या में मंदिर के दर्शन करने के बाद प्राण त्यागना चाहता हूं, फिर राम नगरी में ही दोबारा जन्म चाहता हूं।

पर्यटन को बढावा मिलेगाहाल ही में राजस्थान के राज्यपाल पद से कार्यकाल पूरा करने वाले कल्याण सिंह ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण से पर्यटन को बढावा मिलेगा, जो नया अयोध्या होगा, उससे पूरे यूपी के पर्यटन को बढावा मिलेगा, उम्मीद की जा रही है भूमि पूजन में कल्याण सिंह भी एक दिन पहले ही पहुंचेंगे। उन्होने एक लीडिंग वेबसाइट को इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होने खुलकर बात की है।

सवाल- आप सीएम थे, करीब 28 साल पहले बाबरी मस्जिद को गिराया गया था, आपकी सरकार को बर्खास्त किया गया, आज आप भूमि पूजन के लिये अयोध्या जाने की तैयारी कर रहे हैं, इन घटनाक्रमों और अब तक जो हुए हैं, उन्हें कैसे देखते हैं।
जवाब- मैं इसे विधि का विधान कहूंगा, साल 1528 में मुगल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी ने अयोध्या में रामलला का मंदिर ध्वस्त कर दिया था, ऐसा इसलिये नहीं क्योंकि वो पूजा का दूसरा स्थान बनाना चाहता था, बल्कि वो चाहता था कि हिंदूओं का अपमान हो, शायद ये तय था कि सीएम के रुप में मेरे साथ ही ढांचा ध्वस्त हो जाएगा। अगर विध्वंस ना हुआ होता, तो शायद कोर्ट भी यथास्थिति का आदेश दे देती, इसलिये एक अर्थ में देखा जाएक, तो विध्वंस ने ही 5 अगस्त को भूमि पूजन का मार्ग प्रशस्त किया है।
सवाल- सवाल ये भी उठे कि क्या सीएम के रुप में आपने अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया, मस्जिद की रक्षा के लिये कोशिश नहीं की।
जवाब- मैं आपको बताना चाहूंगा कि उस दिन 6 दिसंबर तनाव के बीच मुझे अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट का फोन आया, बताया गया कि करीब 3.5 लाख कारसेवक जुटे हुए हैं, मुझसे कहा गया कि केन्द्रीय बल मंदिर की ओर आ रहे हैं, लेकिन साकेत कॉलेज के बाहर कार सेवकों द्वारा उनके मूवमेंट को रोक दिया गया था, मुझसे मुझे गया था कि कारसेवकों पर फायरिंग का आदेश देना है या नहीं, मैंने लिखित रुप से अनुमति देने से इंकार कर दिया, अपने आदेश में कहा, जो अभी भी फाइलों में दर्ज है, फायरिंग से लोगों की जानें जाएंगी, अराजकता फैलेगी और कानून-व्यवस्था का मुद्दा बन जाएगा।
सवाल- आपको लगता है कि आपने तब सही फैसला लिया था
जवाब- हां मुझे अपने फैसले पर गर्व है, क्योंकि आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं, कि मैंने अपनी सरकार खो दी थी, लेकिन कार सेवकों को बचा लिया। मुझे लगता है कि उस विध्वंस ने अंततः राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
सवाल- क्या कारसेवकों पर फायरिंग का आदेश नहीं देने वाला फैसला 1990 में मुलायम सरकार द्वारा कार सेवकों पर की गई फायरिंग से प्रेरित था।
जवाब- 1990 में कारसेवकों पर फायरिंग करना गलत फैसला था, लोगों को मारना कोई मजाक नहीं है।
सवाल- आप भूमि पूजन के चुनिंदा आमंत्रितों में से एक हैं, लेकिन प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं जैसे सोनिया गांधी, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, मायावती समेत कई अन्य लोगों को निमंत्रण नहीं मिला है, क्या विपक्षी दलों के नेताओं को नहीं बुलाया जाएगा।
जवाब- ये फैसला राम जन्मभूमि ट्रस्ट को लेना है, लेकिन मैं कहूंगा कि राम सभी के हैं, लेकिन आपने जिन लोगों का नाम लिया, उनमें से ज्यादातर ने राम मंदिर निर्माण का विरोध किया है।
सवाल- राम मंदिर अब वास्तविक रुप लेने जा रहा है, आपने रोजगार सुनिश्चित करने की भी बात की है, ये कैसे होगा, आप क्या सोचते हैं।
जवाब- राम रोटी भी देंगे, राम मंदिर अयोध्या को विश्व स्तर का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बनाएगा, एक नये अयोध्या का निर्माण होने वाला है, इससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेंगे।
सवाल- आप कहते हैं कि राम मंदिर एक सपने के साकार होने जैसा है, आपकी कोई और इच्छा
जवाब- हां राम मंदिर बन जाने तक जीना चाहता हूं, फिर अयोध्या में ही दोबारा जन्म लेना चाहता हूं।
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