जूनियर क्रिकेटर होने पर भी कैसे बन गए थे धोनी टीम के कप्तान, सालों बाद सचिन ने किया खुलासा - Bollyycorn

Breaking

Bollyycorn

Bollywood-Hollywood-TV Serial-Bhojpuri-Cinema-Politics News, Gadgets News

21 August 2020

जूनियर क्रिकेटर होने पर भी कैसे बन गए थे धोनी टीम के कप्तान, सालों बाद सचिन ने किया खुलासा

SACHIN

टीम इंडिया के सुपरहिट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (mahendra singh dhoni) ने इंटरनेशल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। जिसके बाद से  सोशल मीडिया से लेकर गली-चौराहे पर महेंद्र सिंह धोनी और उनकी बेमिसाल कप्तानी के बारे में लोग बातें कर रहे है लेकिन एक दूसरा सच ये भी है कि धोनी मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (sachin tendulkar) की वजह से एक शानदार कप्तान बने है। सौरव गांगुवी द्वारा कप्तानी छोडऩे के बाद बीसीसीआई (BCCI) ने सचिन तेंदुलकर को ही कप्तान बनने का प्रस्ताव एक बार फिर दिया था लेकिन इस दौरान तेंदुलकर ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और एसएस धोनी को नया कप्तान बनाने की सिफारिश की थी। लेकिन अब सालों बाद सचिन तेंदुलकर ने बताया है कि उन्होंने ऐसा फैसला क्यों लिया था।

जूनियर को मौका देने का निर्णय
दरअसल सचिन तेंदुलकर ने अब खुलासा किया है कि उन्हें स्लिप में खड़े रहकर महेंद्र सिंह धोनी के क्रिकेटिया कौशल को अच्छी तरह से परखने का मौका मिल गया था। इस दौरान महसूस हो गया था कि वह भारतीय कप्तान बनने के लिए पूरी तरह तैयार है इसलिए ही जब भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने साल 2007 में कप्तानी के लिए सलाह मांगी। तो उन्होंने विकेटकीपर धोनी का नाम सुझाया था। इस दौरान सिर्फ तेंदुलकर ही नहीं, बल्कि सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने भी जूनियर खिलाड़ियों को मौका देने की बात कही थी। इसी वजह से बीसीसीआई ने सचिन तेंदुलकर की सलाह पर अमल करते हुए धोनी को टीम इंडिया का नया कप्तान बनाया था।

धोनी का क्रिकेटिया दिमाग
धोनी के संन्यास के बाद सचिन तेंदुलकर ने बताया कि, ‘मैं इस मामले को विस्तार से नहीं बताउंगा कि क्या हुआ कैसे हुआ। लेकिन एक बात जरूर करूंगा कि जब मुझसे बीसीसीआई ने कप्तान के बारे में पूछा? तो मैंने बताया कि मैं क्या सोचता हूं। मैंने उस दौरान कहा था कि मैं दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर नहीं जाउंगा क्योंकि मैं तब कुछ चोटों से परेशान था लेकिन मैं स्लिप कॉर्डन में क्षेत्ररक्षण करता था और धोनी से बात करता रहता था और मैंने तब समझा कि वह क्या सोच रहा हैं, क्षेत्ररक्षण कैसे होना चाहिए और तमाम पहलुओं पर मैं उनसे बात करता था। उस दौरान मैंने उसकी मैच की परिस्थितियों को आकलन करने की क्षमता देखी। तब मुझे समझ आया कि धोनी के पास बहुत अच्छा क्रिकेटिया दिमाग है इसलिए ही मैंने बोर्ड के सामने धोनी का नाम सुझाव में दिया था। जिसके बाद धोनी को अगला कप्तान बताया गया।’

कई चीजों में एक जैसी सोच
सचिन तेंदुलकर ने कहा कि मैं धोनी की इस क्षमता से काफी प्रभावित था कि वह हर किसी को मना लेते थे। मैं जो भी कुछ सोचता था उसकी भी लगभग वैसी ही सोच थी। जिससे पता चलता है कि हमारी सोच मिलती-जुलती थी। कई मौके पर हमारी एक ही राय रही है। हम लगभग के ही तरह से सोचते थे। इसी वजह से मैंने उनका नाम आगे रखा।

सिर्फ टीम के लिए खेलना
वहीं, धोनी जब कप्तान बने थे तो टीम में कई सीनियर क्रिकेटर शामिल थे। जिसमें तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और जहीर खान है। इन सीनियर्स के सामने धोनी ने टीम इंडिया को कैसे संभाला। इस बात का जवाब भी सचिन तेंदुलकर ने दिया है। सचिन के कहा कि, ‘मैं सबकी बात नहीं कर सकता। मैं सिर्फ अपना बता सकता हूं। मेरी कभी भी कप्तान बनने की इच्छा नहीं थी। मैं आपसे यह कह सकता हूं मैं टीम के लिए खेलना चाहता था और हर मैच जितने पर ध्यान देना चाहता था। कप्तान टीम में कोई भी हो लेकिन मैं मैच जितना चाहता था। इसी वजह से मुझे जो भी अच्छा लगता था वो बात मैं कप्तान के सामने रख देता था लेकिन कभी भी कप्तान पद पाने की इच्छा मेरे मन में नहीं आई।’

मैंने टीम की जिम्मेदारी समझी थी
इसके आगे तेंदुलकर ने कहा कि, ‘हर टीम में प्रत्येक खिलाड़ी अपनी क्षमता के मुताबिक खेलता है वह अपना अलग योगदान देता है। इसी वजह से अच्छे खिलाड़ियों से कप्तान का भार कम हो जाता है। हर कप्तान और खिलाड़ियों के विचार टीम के लिए मददगार साबित होते है। जब धोनी को साल 2008 में कप्तान बनाया गया। तब मुझे 19 साल हो गए थे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते-खेलते। टीम इंडिया में इतना लंबा समय बिताने की वजह से मैं अपनी जिम्मेदाररी समझता था।’

आपको ये पोस्ट कैसी लगी नीचे कमेंट करके अवश्य बताइए। इस पोस्ट को शेयर करें और ऐसी ही जानकारी पड़ते रहने के लिए आप बॉलीकॉर्न.कॉम (bollyycorn.com) के सोशल मीडिया फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम पेज को फॉलो करें।

No comments:

Post a Comment