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04 August 2020

शादी के फेरे लेने से पहले जान लें उसके 7 फेरों का पूरा मतलब

शादी में सप्तपदी यानी कि सात फेरों के सातों वचन जब होते हैं, तो ज़्यादा शादियों में पंडित इन सातों वचनों के मंत्रों का उच्चारण करके वर और वधू से कहता है कि बोलो हाँ। लेकिन क्या आपने कबी सोचा है कि आख़िर शादी में पति-पत्नी के बीच होने वाले इन सात फेरों में आख़िर क्या वचन लिये जाते हैं। आख़िर वे ऐसे कौन से वादे हैं, जो पति-पत्नी के बीच विवाह होने का मुख्य आधार माना जाता है। यह भी विचार करना बहुत दीगर है कि आख़िर शादी के सातों फेरों का क्या प्वाइंट है या कोई प्वाइंट है भी कि नहीं? ऐसे कई सवाल हमारे जहन में उठते हैं। इसलिए आज हम शादी के सातों फेरों का मतलब आपको बताएँगे।
पहला वचनः
पहला वचन स्त्री अपने वर से माँगते हुए कहती है कि आप कभी तीर्थयात्रा करने जाएं तो मुझे भी अपने संग लेकर जाइएगा. यदि आप कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धार्मिक कार्य करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग (बांई ओर) में बिठाएं। यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।
दूसरा वचनः
इसमें स्त्री अपने वर से अपने माता-पिता के मान-सम्मान का वचन माँगती है कि जैसे आप अपने अभिभावकों का सम्मान करते हैं, वैसे ही मेरे माँ-बाप को भी मानें।
तीसरा वचनः
तीसरे वचन में वधू कहती है कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा पालन करते रहेंगे।
चौथा वचनः
चौथे वचन में स्त्री कहती है कि भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दायित्व आपके कंधों पर है।
पाँचवा वचनः
पाँचवें वचन में कन्या कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाह आदि, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी राय लिया करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।
छठा वचनः
इसमें स्त्री दो तरह की बातें कहती है। पहली, कि यदि मैं कभी अपनी सहेलियों या अन्य महिलाओं के साथ बैठी रहूँ तो आप सामने किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। और दूसरी, कि वर विवाह के बाद जुआ आदि की बुराइयों से दूर रहे।
सातवाँ वचनः
अंतिम और सातवें वचन में स्त्री ये वचन माँगती है कि उसका पति पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी स्त्री को भागीदार न बनाए और परायी स्त्रियों को माँ-बहन समझे।

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