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31 August 2020

2 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, भूल से भी ना करें लोहे के पात्र का उपयोग, सिर्फ 7 चीजें आवश्यक


हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्त्व है। पितृ पक्ष ने लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा भाव दिखाते हैं और उनके न से तर्पण करते हुए सामर्थ्यनुसार दान पुन्य करते हैं। हिन्दू धर्म के मतानुसार श्राद्ध अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में होता हैं। यह 16 दिन तक मनाया जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता ही। माना जाता है कि पितृ पक्ष के दिनों में यमराज अभी पितरों को मुक्त कर देते हैं ताकि वह अपनी संतानों से पिंडदान लेने आ सकें। इस बार पितृ पक्ष दो सितंबर से शुरू होगा। पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों के नाम पर दान और तर्पण करतेहैं। साथ ही ब्रह्मणों के खाना भी खिलाते हैं। हमारे शास्त्रों के मुताबिक इन्सान पर तीन तरह का ऋण होता है, जिसे इसी जन्म में उतरना आवश्यक होता है।

देव ऋण,ऋषि ऋण और पितृ ऋण,पितृ ऋण को श्राद्ध करके उतरा जाता हैं। भाद्र पद शुक्ल पूर्णिमा से प्रारम्भ करके आश्विन कृष्ण अमावस्या तक सोलह दिन पितरों का तर्पण और विशेष तिथि पर श्राद्ध करना चाहिए।शास्त्रों के मुताबिक कुल 12 प्रकार से श्राद्ध किया जाता है। जैसे कि नैमित्तिक- श्राद्ध, वृद्धि-श्राद्ध, नित्य-श्राद्ध, काम्य-श्राद्ध,सापिण्ड-श्राद्ध, पार्वण-श्राद्ध, गोष्ठ-श्राद्ध, शुद्धि-श्राद्ध, दैविक-श्राद्ध, कर्माग-श्राद्ध, औपचारिक-श्राद्ध तथा सांवत्सरिक-श्राद्ध। सभी श्राद्धों में सांवत्सरिक श्राद्ध सबसे श्रेष्ठ है। इसे मृत व्यक्ति की तिथि पर किया जाता है। श्राद्ध करने में दूध, गंगाजल, मधु,तसर का कपड़ा, दौहित्र, कुतप काल(दिन का आठवां मुहूर्त) और तिल का प्रयोग किया जाता है।

चांदी का पात्र सबसे उपयुक्त

धर्म शास्त्र के मुताबिक श्राद्ध कभी भी लोहे के पात्र में नहीं करना चाहिए यह मान्य नहीं होता। श्राद्ध करने के लिए सोना,चांदी, कांस या फिर तांबे का पात्र उपयुक्त होता है। हालंकि श्राद्ध के लिए चांदी का पात्र सबसे उपयुक्त माना गया है। केले के पत्ते में श्राद्ध भोजन सर्वथा निषिद्ध है।

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