बेटे को एग्जाम दिलवाने के लिए पिता ने चलाई 106 KM साइकिल, IPS बोले- आ गई बचपन की याद - Bollyycorn

Breaking

Bollyycorn

Bollywood-Hollywood-TV Serial-Bhojpuri-Cinema-Politics News, Gadgets News

21 August 2020

बेटे को एग्जाम दिलवाने के लिए पिता ने चलाई 106 KM साइकिल, IPS बोले- आ गई बचपन की याद

आंखों में कुछ सपने लेकर और दिल में अरमानों का आशियाना सहेजे..जब एक बेबस पिता अपने बेटे को परीक्षा दिलाने के लिए पहुंचा तो उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी को अपना बचपन याद आ गया। चहेरे पर बेरुखी का साया और आंखों में अश्कों का समंदर लिए जब वो पिता अपने बेटे को परीक्षा दिलवाने पहुंचा तो..वो IPS अधिकारी अपने आप पर काबू नहीं कर पाए। कोरोना काल में बेबस हो चुका पिता वीरान सड़कों से अपनी दो पहिए की साइकिल से ही अपने बेटे को परीक्षा दिलवाने पहुंचा तो आईपीएस अधिकारी की निगाहें नम हो गई। उस बेबस पिता और उस मासूम बच्चे को देख IPS अधिकारी को याद आ गया अपना वो दर्दनाक बचपन..जब कभी उनके पिता इसी तरह अपनी बेबसी को अपना हमसफर बना कर अपने ख्वाबों को मुकम्मल करने चल पड़े थे।

बताते चले कि यह बच्चा मध्यप्रदेश के धार जिले का है। इसके पिता पेशे से मजदूर हैं। कोरोना काल में अब तो जिदंगी जीना दुश्वार हो चुका है। आलम यह है कि हर सुबह का साया इनके लिए संघर्षों का ठिकाना बन रहा है, जिससे इन्हें हर रोज रूबरू होना पड़ रहा है। खैर, जिस तरह की जिंदगी यह जी रहे हैं.. वो चाहते हैं कि उनका बेटा भी इसी तरह की संघर्षमय और दर्दनाक जिंदगी जीए, इसलिए इन्होंने अपने बेटे को 106 किमी का सफर तय कर 10वीं की परीक्षा दिलाने के लिए पहुंचा। आलम यह है कि कोरोना काल में सड़कें अब वीरान हो चुकी है। सड़कों पर पसरा सन्नाटा और खामोश हो चुकी निगाहों को देख इन बाप-बेटों ने हार नहीं मानी, जब किसी भी प्रकार का कोई वाहन नहीं मिला तो इन्होंने अपने दो पहिए की साइकिल को ही अपना सहारा बना लिया और पहुंच गए अपनी मंजिल के बेहद करीब 10वीं की परीक्षा देने।

उधर, जैसे ही उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी नवनीत सिकोरा को इनकी खबर लगी तो यह काफी भावुक हो गए। अपने आपको रोक नहीं पाए। अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाए और फिर फेसबुक पर अपनी दर्दनाक और संघर्षमय बचपन को याद करते हुए लंबा पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने लिखा कि  ‘ये खबर देखी तो आंखे डबडबा गई अब से कुछ दशक पहले मेरे पिता भी मुझे मांगी हुई साईकल पर बिठा कर IIT का एंट्रेंस एग्जाम दिलाने ले गए थे। वहां पर बहुत से स्टूडेंट्स कारों से भी आये थे , उनके साथ उनके अभिभावक पूरे मनोयोग से उनकी लास्ट मिनट की तैयारी भी करा रहे थे, मैं ललचाई आंखों से उनकी नई नई किताबों (जो मैंने कभी देखी भी नहीं थी) की ओर देख रहा था और मैं सोचने लगा कि इन लड़कों के सामने मैं कहां टिक पाऊंगा और एक निराशा सी मेरे मन में आने लगी।

वहीं, आगे आईपीएस अधिकारी लिखते हैं कि मेरे पिता ने इस बात को नोटिस कर लिया और मुझे वहां से थोड़ा दूर अलग ले गए और एक शानदार पेप टॉक (उत्साह बढ़ाने वाली बातें) दी। उन्होंने कहा कि इमारत की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है नाकि उस पर लटके झाड़ फानूस पर, जोश से भर दिया उन्होंने फिर एग्जाम दिया। परिणाम भी आया, आगरा के उस सेन्टर से मात्र 2 ही लड़के पास हुए थे जिनमें एक नाम मेरा भी था
ईश्वर से प्रार्थना है कि इन पिता पुत्र को भी इनकी मेहनत का मीठा फल दें।आज मेरे पिता हमारे साथ पर नहीं हैं। उनकी कड़ी मेहनत का फल उनकी सिखलाई हर सीख हर पल मेरे साथ है और हर पल यही लगता है कि एक बार और मिल जाएं तो जी भर के गले लगा लूं।

क्या कहा बेटे ने
बेटे आशिष ने कहा कि तीन दिन लगातार उसकी परीक्षाएं है, इसलिए पिता पुत्र दोनों ही खाने पीने का समान और बिछौना भी लेकर आए हैं। बेटे ने कहा कि कोरोन काल के दौरान जब कोई सहारा नहीं मिला तो फिर अंत में अपनी साइकिल को ही अपना सहारा बना लिया। आशिष नहीं चाहता था कि उसका एक साल बर्बाद जाए, इसलिए उसने और उसके पिता ने अपनी साइकिल को ही अपना सहारा बनाकर 106 किमी का सफर तय कर परीक्षा देने पहुंचा।

आपको ये पोस्ट कैसी लगी नीचे कमेंट करके अवश्य बताइए। इस पोस्ट को शेयर करें और ऐसी ही जानकारी पड़ते रहने के लिए आप बॉलीकॉर्न.कॉम (bollyycorn.com) के सोशल मीडिया फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम पेज को फॉलो करें।

No comments:

Post a Comment