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26 July 2020

Kargil Vijay Diwas: कारगिल युद्ध का वो वीर सपूत जिसने हथियार खत्म होने के बाद भी दुश्मनों का डटकर किया था मुकाबला

कारगिल (kargil) का युद्ध 1999 में भारत और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच लड़ा गया था। युद्ध से पहले पाकिस्तान और भारत के संबंध मधुर हो रहे थे। संबंधों का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 19 फरवरी, 1999 को तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों, सांसदों, लेखकों, कलाकारों को लेकर बस से लाहौर पहुंचे थे। होनी को कौन टाल सकता है। पाकिस्तान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण कारगिल के क्षेत्रों पर धोखे से कब्जा कर लिया था। देखते ही देखते युद्ध छिड़ गया।
इस युद्ध में भारतीय सेना ने ऐसा पराक्रम दिखाया जिसे यादकर दुश्मन आज भी खौफ में रहते हैं। इस लड़ाई में दिल्ली से ताल्लुक रखने वाले जांबाज भारतीय सैनिक हनीफुद्दीन ने भी हिस्सा लिया था। हनीफुद्दीन का जन्म 23 अगस्त, 1974 को हुआ। हनीफुद्दीन ने 7 जून, 1997 को भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया था।
राजपूताना राइफल में तैनात हनीफुद्दीन के कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लड़ते वक्त हथियार खत्म हो गए थे। लेकिन देश के लिए कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छा ने उन्हें पीछे हटने नहीं दिया और वह आगे बढ़ते रहे। उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया। कारगिल युद्ध में भारत की जीत हुई और तुरतुक सेक्टर का नाम हनीफुद्दीन सब सेक्टर रखा गया। 7 जून, 1999 को कारगिल के तुरतुक सेक्टर में वीर शिवाजी की ही तरह वह दुश्मनों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।

हनीफुद्दीन को गायकी का शौक था। वह बर्फ से ढकी हसीन वादियों में अक्सर अपने साथियों को गाना गाकर सुनाया करते थे। हनीफ बचपन से ही काफी होनहार थे। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के दौरान मिस्टर शिवाजी का खिताब भी जीत था। 7 साल की उम्र में ही उनके पिता गुजर गए थे। जिसके बाद उनकी मां हेमा अजीज ने उनकी देख रेख की।
मां के हिंदुस्तानी क्लासिकल सिंगर होने का असर बेटे पर भी हुआ था। उन्होंने राजपूताना राइफल में एक जॉज बैंड बनाया था। हनीफ की नानी स्वतंत्रता सेनानी थीं और उन्हें अपनी नानी से बहुत लगाव था। वह नानी को अक्सर कारगिल की गतिविधियों के बारे चिट्ठियां लिखा करते थे।
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