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26 July 2020

एम्स का दावा : बुखार नहीं बल्कि कोरोना वायरस का यह है प्रमुख लक्षण

दुनिया भर में कोरोना वायरस का प्रमुख लक्षण भले ही बुखार और नाक बहना दिखा हो लेकिन भारत में ऐसा कतई नहीं है। यहां मात्र 17 फीसदी मरीजों में ही संक्रमण के दौरान बुखार के लक्षण दिखे। दिल्ली एम्स के चिकित्सकों ने बीमारी के शुरुआत में ही इस पर शोध करना शुरू कर दिया था, जिसका विवरण आईसीएमआर से संबधित संस्थान इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक एम्स के शोधकर्ताओं ने 144 मरीजों पर अध्ययन किया,जिसका नतीजा यह निकला कि जिस प्रकार दुनिया के बाकी देशों में कोरोना संक्रमित मरीजों प्रमुख लक्षण बुखार था वैसा भारत में बिल्कुल नहीं था। भारत में बहुत कम कोरोना संक्रमितों में बुखार के लक्षण दिखे, यहां कोरोना पॉजिटिव लोगों शुरूआती दौर में सांस की दिक्कत महसूस की।
शोधकर्ताओं ने पाया कि मात्र 17 प्रतिशत मरीजों को ही बुखार हुआ। अध्ययन के निष्कर्षों पर दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रंजीत गुलेरिया का कहना है कि वायरस के लक्षणों के बारे में हमें समय के साथ कुछ न कुछ नया पता चल रहा है। यह संक्रमण हमारे आंकलन से ज्यादा व्यवस्थित तरीके से फैल रहा है। गौरतलब है कि यह अध्ययन दिल्ली एम्स में 23 मार्च से 15 अप्रैल तक भर्ती रहे 144 मरीजों पर किया गया जो कि उत्तर भारत के अलग-अलग शहरों से थे। शोध टीम में एम्स के निदेशक डॉ. रंजीत गुलेरिया सहित कुल 29 विशेषज्ञ शामिल थे।

अन्य शारीरिक लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी
शोधकर्ताओं ने 144 मरीज पर शोध किया और पाया कि मात्र 17 प्रतिशत मरीजों में ही बुखार के लक्षण दिखे। बाकी सिम्प्टोमैटिक मरीजों में श्वसन संबंधी समस्याएं, गले में खराश और खांसी जैसे के लक्षण नजर आए। इन मरीजों में 44 प्रतिशत मरीज एसिम्प्टोमैटिक थे जिनमें अस्पताल में भर्ती होने से उपचार होने तक कभी बुखार ही नही आया। इस आधार पर शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि कोरोना वायरस शुरुआत से ही ‘साइलेंट स्प्रेडर’ की तरह बिना लक्षण के लोगों को संक्रमित कर रहा था। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष दिया कि चूंकि बहुत कम पॉजिटिव मरीजों को बुखार था इस हिसाब से आगे भी मरीजों की जांच व उपचार के दौरान मरीजों के दूसरे शारीरिक लक्षणों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
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