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25 July 2020

विडंबना यह है कि इतनी बड़ी खबर दिल्ली किसी अखबार में आज दी नहीं, जया जेटली को सजा

वह कहावत है ना सूप तो सूप, छलनी भी बोले जिसमें 956 छेद । कल दिल्ली की एक अदालत ने रक्षा सौदों में घूसखोरी के मामले में जया जेटली सहित तीन लोगों को सजा सुनाई । यह वही मामले हैं जो तहलका ने स्टिंग ऑपरेशन किए थे ,जिसमें बंगारू लक्ष्मण को सजा हुई और विडंबना यह है कि इतनी बड़ी खबर दिल्ली किसी अखबार में आज दी नहीं। यह तो भला हो वैकल्पिक मीडिया का जो जनचौक नामक न्यूज़ पोर्टल ने द वायर के संदर्भ से अपनी साइट पर डाला है।

क्या है मामला
आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 9 के तहत चार्जशीट दाखिल की गई। सीबीआई ने चौथे आरोपी कानपुर के उद्योगपति सुरेंद कुमार सुरेखा को सरकारी गवाह बनाया है। इन चारों के खिलाफ 6 दिसंबर 2004 को मामला दर्ज किया गया था।

जांच के दौरान सीबीआई ने आरोप लगाया कि तहलका पोर्टल के रिपोर्टरों ने रक्षा मंत्रालय से हथियारों के ऑर्डर लेने के लिए मुरुगई और सुरेखा के जरिए जया से मदद मांगी थी। चार्जशीट के मुताबिक इस संबंध में तत्कालीन रक्षामंत्री फर्नांडिस के सरकारी आवास पर एक मीटिंग के दौरान जया के इशारे पर गोपाल को 2 लाख रुपये सौंपे गए। जया और रिपोर्टरों के बीच बैठक के दौरान मुरुगई और सुरेखा भी मौजूद थे। इस काम में मदद के लिए सुरेखा ने कथित रूप से 1 लाख रुपये लिए, जबकि मुरुगई को नियमित अंतराल पर भुगतान किए गए।

फैसला
दिल्ली की एक सीबीआई कोर्ट ने 2001 के रक्षा सौदों से जुड़े एक मामले में समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली को सजा सुनाई है। इसके साथ ही दो और लोगों उनकी पार्टी के सहयोगी गोपाल पचरवाल और रिटायर्ड मेजर जनरल एसपी मुरगई को भी सजा सुनाई गयी है।

सीबीआई जज वीरेंद्र भट ने शुक्रवार को इसका ऐलान किया। मामला अटल बिहारी वाजपेयी के शासन के दौरान 2000 में हुए एक रक्षा सौदे से जुड़ा है। जिसका तहलका डॉट कॉम ने ‘आपरेशन वेस्ट एंड’ के नाम से स्टिंग आपरेशन किया था। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सीबीआई ने जेटली और दूसरों के खिलाफ 2006 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

जज भट ने भ्रष्टाचार निरोधी एक्ट के तहत जेटली, मुरगई और पचरवाल को आपराधिक षड्यंत्र का दोषी पाया। दिलचस्प बात यह है कि ‘आपरेशन वेस्ट एंड’ में पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस औऱ बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का नाम भी आया था। हालांकि बंगारू लक्ष्मण की 2014 में मौत हो गयी और जार्ज फर्नांडिस का निधन अभी पिछले साल हुआ है।

स्टिंग आपरेशन में तहलका जर्नलिस्ट मैथ्यू सैमुअल द्वारा बंगारू लक्ष्मण को पैसा देते हुए दिखाया गया था जिसे लक्ष्मण स्वीकार करते हुए दिख रहे थे।
मैथ्यू सैमुअल का कहना है कि आपराधिक षड्यंत्र का दोषी पाए जाने के बाद ही बंगारू लक्ष्मण को 2012 में गिरफ्तार किया गया था। आउटलुक के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि “हालांकि बंगारू को सजा और फिर हुई जेल से मुझे खुशी और गम का मिला जुला एहसास हुआ था। यह रक्षा सौदों में घोटालों और भ्रष्टाचार का दौर था मेरी इस सोच पर मुहर लग गयी थी। लेकिन साथ ही सीबीआई द्वारा मुकदमे को तेजी से निपटाने के क्रम में बीजेपी के दलित आइकन से ज्यादा पूछताछ को लेकर मैं परेशान भी था। जबकि इस मामले में शामिल दूसरे प्रभावशाली लोग मसलन जया जेटली, आरके गुप्ता, आरके जैन समेत दूसरों के साथ ऐसा नहीं किया गया।“



दिलचस्प बात यह है कि उस समय बंगारू लक्ष्मण के पास उनका एक समर्थक था जो मौजूदा समय में देश के महामहिम हैं। द वायर ने सीबीआई कोर्ट को कोट करते हुए लिखा है कि “कोविंद ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह बंगारू लक्ष्मण को 20 साल से जानते हैं। उन्होंने सीधे कहा कि बंगारू लक्ष्मण बिल्कुल सीधा सोचने वाले, सहज और ईमानदार शख्स हैं, जो भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बने।”

यहां तक कि जेटली और दूसरों के मुकाबले आउटलुक के तत्कालीन संपादक विनोद मेहता लक्ष्मण के प्रति सहानुभूति रखते थे। उन्होंने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि बंगारू लक्ष्मण को फंसा दिया गया था।
जेटली और फर्नांडिस की भूमिकाजैसा कि मैथ्यू सैमुअल ने कहा कि “जेटली भी टेप में (पैसा) स्वीकार करते हुए देखी गयी थीं। लेकिन स्टिंग दिखाए जाने के तुरंत बाद वह देश से गायब हो गयीं और न्यूज चैनल पर बहुत बाद में ये कहते हुए लौटीं कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया था और वह इस्तीफा नहीं देंगी। हालांकि जेटली संयोग से बाहर हो गयी थीं और उसके कुछ दिनों बाद जार्ज फर्नांडिस को भी जसवंत ने रिप्लेस कर दिया था। साथ ही इसमें बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। जिनके साथ ऐसा किया गया था।”
हालांकि स्कैंडल में फर्नांडिस का नाम आने के बाद उनके खिलाफ जस्टिस फूकन के नेतृत्व में एक सदस्यीय जांच आयोग बैठाया गया था जिसने उनका नाम क्लीयर कर दिया। फूकन कमेटी की रिपोर्ट को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने खारिज कर दिया था। इसके साथ ही जस्टिस वेंकटस्वामी के नेतृत्व में एक नई कमेटी गठित कर दी गयी थी। कमेटी ने पूरे मामले की गहराई से जांच की। लेकिन रिपोर्ट पेश करने से पहले ही जस्टिस वेंकटस्वामी ने इस्तीफा दे दिया।
इस स्टिंग आपरेशन की देश की इलेक्ट्रानिक मीडिया में बहुत चर्चा हुई थी।
गोपाल पचरेवाल भा ज पा में हैं और वसुंधरा सरकार ने उन्हें राजस्थान सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष बनाया था।
(वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी के फेसबुक वॉल से साभार, ये लेखक के निजी विचार हैं)
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